Sunday, Dec 04, 2022
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Mahatma Gandhi had come to Baba Gorakhnath temple in Katwaria Sarai

कटवारिया सराय के बाबा गोरखनाथ मंदिर में आए थे महात्मा गांधी

  • Updated on 6/27/2022

नई दिल्ली/पुष्पेंद्र मिश्र। देश में बाबा गोरखनाथ का गोरखपुर उत्तर प्रदेश में बहुत प्रसिद्ध धाम बना हुआ है। लेकिन आज की पीढ़ी दिल्ली के कटवारिया सराय में स्थित बाबा गोरखनाथ मंदिर के बारे में कम ही जानती है। जबकि यहां के मंदिर की मान्यता भी कम नहीं है। आजादी से पहले देश के स्वतंत्रता सेनानी व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी बाबा गोरखनाथ के दर्शन करने आते थे। इतना ही नहीं यहां मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मत्था टेकने आ चुके हैं।

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हरसुख के साथ घटी अनूठी घटना से सामने आया सच 
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यहां पहले एक हरसुख नामक व्यक्ति रहता था। जो रोज जंगल में अपने जानवर चराने ले जाता था। लेकिन हरसुख के साथ एक अजीब वाक्या रोज घटने लगा। हरसुख जब घर से निकलते तो सफेद कपड़े पहन के निकलते। लेकिन जानवर चराने के बाद जंगल से जब वापस आते तो उनके कपड़े गेरुआ(भगवा) हो जाते। इस पर घर वाले उनकी डांट लगाते और कहते जाते तो सफेद कपड़े पहनकर हो फिर ये कपड़े भगवा कहां से कर लाते हो ? हरसुख से कड़ाई से जब पूछताछ हुई तो उन्होंने बताया कि हमें जंगल में बाबा गोरखनाथ मिलते हैं।

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बाबा ने कहा कटवारिया सराय के कुल देवता यहीं हैं 
बाबा कहते हैं कि कटवारिया सराय के लोग अपने कुल देवी देवताओं के पूजन के लिए झड़ौदा कलां न जाया करें। कटवारिया सराय के बुजुर्गों के कुल देवता का स्थान कटवारिया सराय में ही फलां जगह जमीन के अंदर बना हुआ है। उसकी खुदाई करो तो वहां मूर्तियां निकलेंगी। गांव वालों से कहो कि झड़ौदा कलां न जाएं खुदाई के बाद यहीं पूजा पाठ करें।

वर्ष में दो बार लगता है बाबा गोरखनाथ मंदिर पर मेला 
गांव वालों ने बाबा गोरखनाथ के कहे अनुसार उक्त स्थान पर खुदाई की। गांव वालों को वहां मूर्तियां मिल गईं। जिन्हें स्थापित कर मंदिर बना बाबा गोरखनाथ का। गांव के 70 वर्षीय जयदेव ने कहा कि ये गोरखनाथ मंदिर बहुत पुराना है। यहां वर्ष में दो बार मेला लगता है। जिसमें दिल्ली देहात के सभी गांवों से लाखों लोग बाबा गोरखनाथ के दर्शन करने आते हैं। मेले के दौरान कुश्ती प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है। 

तालाब में डूबे व्यक्ति को बाबा ने बचाया 
कटवारिया सराय में दबी मूर्तियों के लिए खोदी गई जगह पर एक तालाब बन गया जिसे राम तालाब कहा गया। गांव के 84 वर्षीय मास्टर सुखवीर सिंह कहते हैं कि राम तालाब के बारे में एक कहानी प्रचलित है। यहां एक व्यक्ति डूब गया था। लोगों ने काफी मशक्कत की। काफी देर बाद जब व्यक्ति पानी से निकाला गया तो वह जिंदा निकला। उसने पानी से बाहर निकलकर बताया कि उसे बाबा गोरखनाथ ने अपनी गोद में बिठा रखा था। 
 

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