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mahatma gandhi that is why did not join celebration of independence day

स्वतंत्रता दिवस : जानिए, आखिर आजादी के जश्न में क्यों शामिल नहीं हुए थे महात्मा गांधी?

  • Updated on 8/14/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत अपना 73वां स्वाधीनता दिवस Independence Day का जश्न मनाने को तैयार है। देश के स्वाधीनता संग्राम में अनगिनित लोगों ने तन-मन-धन से सहयोग किया, लेकिन महात्मा गांधी Mahatma Gandhi के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। खास बात यह है कि जब हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ, तो महात्मा गांधी स्वतंत्रता दिवस के जश्न में शामिल नहीं हुए। इसकी वजह है, उस समय की तात्कालीन परिस्थितियां। 

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दरअसल, जिस समय भारत को आजादी मिली, उस दौरान महात्मा गांधी Mahatma Gandhi बंगाल के नोआखली में थे। बापू हिन्दू और मुसलमानों के बीच जारी सांप्रदायिक हिंसा को रोकने की खातिर अनशन पर बैठे हुए थे। इस दौरान तय हुआ कि भारत की आजादी का दिन 15 अगस्त को होगा। इसकी जानकारी गांधीजी को जवाहर लाल नेहरू और सरदार बल्लभ भाई पटेल ने खत लिखकर दी थी।

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इसके साथ ही खत में लिखा गया था, 'आप राष्ट्रपिता हैं और इसमें शामिल होकर हम सभी को आशीर्वाद दें। लेकिन, इसके जवाब में महात्मा गांधी Mahatma Gandhi ने उत्तर दिया कि कलकत्ता में हिंदू-मुसलमान एक-दूसरे की जान ले रहे हैं, तो मैं आजादी का जश्न कैसे मना सकता हूं। मैं सांप्रदायिक दंगे रोकने के लिए अपनी जान दे दूंगा। इस तरह उन्होंने आजादी के जश्न में शामिल होने से इनकार कर दिया। 

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बता दें कि महात्मा गांधी भारत-पाकिस्तान विभाजन के पक्ष में नहीं थे। वे चाहते थे कि देश का बंटवारा धर्म के आधार पर नहीं किया जाए। लेकिन, मोहम्मद अली जिन्ना और नेहरू समेत अन्य कांग्रेसी नेताओं की अड़ियल रूख और ब्रिटिश हुकूमत की विभाजनकारी चालों के आगे गांधी जी के एक नहीं चली। लेकिन, बाद में जब गांधी जी Mahatma Gandhi अनशन पर बैठे तो मुस्लिमों को भी उनकी इच्छानुसार भारत या पाकिस्तान में रहने का फरमान जारी किया गया। 

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