Saturday, Jul 21, 2018

#MalalaDay: 11 साल की गुमनाम ब्लॉगर, नोबेल विजेता और मलाला डे, पढ़ें साहस की कहानी!

  • Updated on 7/12/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मलाला युसुफजई, 2007 से पहले पाकिस्तान की स्वात घाटी की एक मासूम बच्ची जिसे अपनी पढ़ाई से ज्यादा कुछ नहीं प्यारा था। लेकिन आज दुनिया भर में जाना माना नाम और साहस की मिसाल मलाला युसुफजई ने 11 साल की उम्र में आतंकवाद से लोहा लिया था और सिर में गोली खाई थी। महिलाओं और लड़कियों के हक के लिए आवाज बुलंद करती पाकिस्तानी लड़की मलाला युसुफजई को कौन नहीं जानता? 12 जुलाई को मलाला दिवस के तौर पर मनाया जाता है। आखिर क्यों 12 जुलाई है मलाला दिवस?

पिता से मिली हिम्मत, तो सिर पर खाई गोली

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा की स्वात घाटी की रहने वाली मलाला स्वात घाटी में लड़कियों की शिक्षा पर लगी बंदिशों के खिलाफ लड़ती थी और आवाज बुलंद करती थी। साल 2007 और 2009 के बीच स्वात घाटी पर तालिबान का कब्जा था जिसने लड़कियों के स्कूल जाने पर प्रतिबंध लगा दिया।

पिता जियाउद्दीन यूसुफजई खुद भी स्वात घाटी में लड़कियों की शिक्षा को लेकर पैरवी करते थे। तब मलाला ने तालिबानियों के खिलाफ लोकल प्रेस क्लब में भाषण दिया जिसके बाद 9 अक्टूबर 2012 को तालिबानियों ने स्कूल जाते हुए बस में घुसकर मलाला के सिर पर गोली माल दी। इलाज के लिए ब्रिटेन के क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी जान बचा ली गई। 

बीबीसी उर्दू की एक गुमनाम ब्लॉगर 'गुल मकई'

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2008 में बीबीसी उर्दू के आमेर अहमद खान और उनकी टीम स्वात घाटी की सच्चाई को दुनिया के सामने लाना चाहते थे इसके लिए वो किसी गुमनाम रुप से ब्लॉग लिखवाना चाहते थे। इसके लिए मलाला के पिता से संपर्क किया गया और फिर जियाउद्दीन ने अपीन बेटी को इस काम के लिए चुना। मलाला ने 11 साल की उम्र में 'गुल मकई' के नाम से बीबीसी उर्दू के लिए ब्लॉग लिखा और अपने विचारों और वहां के हालातों को दुनिया के सामने रखा। मलाला का पहला ब्लॉग 3 जनवरी 2009 को बीबीसी उर्दू ब्लॉग पर डाला गया। 

डेक्यूमेट्री में बताई स्वात घाटी की सच्चाई

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मलाला के साहस को हर जगह से सराहना मिलने लगी। New York Times ने मलाला पर एक डक्यूमेंट्री बनाई। पाकिस्तान में उन्हें नेशनल यूछ पीस प्राइज से नवाजा गया और कई अवार्ड्स के लिए नॉमिनेट किया गया। मलाला की मिली शोहरत तालिबानियों को रास नहीं आई और 2012 में मलाला पर हमला कर दिया जिसमें उनके सिर में लगी गोली कंधें में घुस गई। लंबे इलाज के बाद मलाला ठीक हो गई। 

नोबेल प्राइस विजेता

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इस साहस के लिए 10 अक्टूबर 2014 में नोबेल पीस प्राइज से भी नवाजा गया। दुनिया भर के पुरस्कार मलाला की हिस्से आए। ब्रिट्रेन की महारानी से लेकर बराक ओबामा तक सभी मलाला के कायल हैं। अपने 16वें जन्मदिन पर मलाला ने 12 जुलाई 2013 को संयुक्त राष्ट्र में भाषण दिया और इस दिन को ही UN ने मलाला दिवस घोषित कर दिया। 

लौटना चाहती हैं पाकिस्तान

मलाला अब अपने परिवार के साथ ब्रिटेन के बर्किंघम में रहती है और अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं। 2014 में उन्होंने वापस पाकिस्तान जाकर देश के लिए कुछ करने की इच्छा जताई थी। मलाला फंड के नाम से दुनिया भर में लड़कियों की शिक्षा और उसके खिलाफ उठने वाली आवाजों की मदद करने के लिए फंड जुटाया जाता है जिसे खुद मलाला देखती हैं। 

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