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malik said holding panchayat elections in kashmir was challenging albsnt

मलिक ने कहा- कश्मीर में पंचायत चुनाव कराना रहा चुनौतीपूर्ण,अब्दुल्ला और महबूबा का नहीं मिला सहयोग

  • Updated on 5/23/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में चुनाव कराना कितना असहज रहा, खासकर के जब मुख्यधारा की पार्टी ही पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने लगे। लेकिन जनमानस के मन में चुनाव को लेकर उत्साह का ही नतीजा रहा  कि कश्मीर में पंचायत का चुनाव शांति-पूर्वक संपन्न हो गया। यह बात आज  जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कही है। उन्होंने यहां तक कहा कि उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की पार्टी ने पंचायत के चुनाव से किनारा कर लिया तो इसके पीछे की वजह को जानना मुश्किल नहीं है। उन्होने दावा किया कि पाकिस्तान ने इन पार्टियों के नेताओं पर पंचायत चुनाव में न हिस्सा लेने का दवाब बनाया था।

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 सत्यपाल मलिक के कार्यकाल में ही हटा धारा 370 

मालूम हो कि मौजूदा समय में गोवा के राज्यपाल सत्यपाल मलिक पिछले साल अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे थे। उनके ही कार्यकाल में पिछले साल 5 अगस्त को धारा 370 हटाने का पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी। जिसके बाद कश्मीर में शांति बहाल करने के लिये ही फारुख अब्दुला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को नजरबंद रखा गया था। उन्होंने कहा कि जब पीएम मोदी ने घोषणा की जम्मू कश्मीर में पंचायत चुनाव होंगे। तो उसके बाद वे उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के घर पहुंचे थे। उन्होंने प्रोटोकॉल का भी ख्याल नहीं रखा। उनके लिये घाटी में अमन-शांति बहाल करना लक्ष्य रहा था।

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पंचायत चुनाव में रिकार्ड वोट पड़े

लेकिन एक तरफ आतंकवादी चुनाव न कराने को लेकर की धमकी दे रहे थे, तो दूसरी तरफ हुर्रियत भी चुनाव बहिष्कार की बात कर रहे थे। लेकिन उन्हें तब गहरा धक्का लगा जब उमर और महबूबा ने भी कदम पीछे खींच लिये। लेकिन चुनाव के दौरा हिंसा को नहीं होने दिया गया तो वहीं रिकार्ड वोटिंग भी पड़ें। सत्यपाल मलिक ने कहा कि 50 हजार सरकारी पद जो खाली थे उसे भरने के लिये वे आदेश दिये थे। जिसमें कश्मीरी युवाओं के लिये बहुत बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि  1 साल के दौरान 51 डिग्री कॉलेज, 8 मेडिकल कॉलेज, 282 जूनियर स्कूलों को हायर सेकेंड्री में बदलकर जनता के हित में तेजी से कदम उठाये।

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