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Malmaas 2020: 160 साल बाद बना सर्वार्थसिद्धि योग, मलमास में पूरी होंगी मनोकामनाएं

  • Updated on 9/19/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। इस बार 160 सालों बाद मलमास में विशेष योग बन रहे हैं। मलमास को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है जो तीन वर्ष में एक बार आता है। इस बार मलमास 18 सितंबर से शुरू हो रहा है और इसका समापन 16 अक्टूबर को होगा उसके बाद 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ होगा। मलमास के पूज्य देव भगवान विष्णु हैं। 

मलमास के बारे में काफी कम लोगों को जानकारी है ऐसे में सब जानना चाहते है कि मलमास क्या है। हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक 30 तिथियां होती हैं, जिसे सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर बनाया जाता है। इसमें 15 दिनों का कृष्ण पक्ष और 15 दिनों का शुक्ल पक्ष होता है। कृष्ण पक्ष के 15वें दिन अमावस्या और शुक्ल पक्ष के 15वें दिन पूर्णिमा होती है। सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर हिन्दू कैलेंडर की तिथियां घटती बढ़ती रहती हैं और तीन वर्ष तक जो तिथियां घटती और बढ़ती हैं, उनसे बचे समय से हर तीन वर्ष पर एक माह का निर्माण होता है, जो अधिक मास या मलमास कहलाता है।

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ऐसा बनेगा आपका काम
मलमास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु जी हैं, इसीलिए मलमास के समय भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक इसे काफी विशेष माना जाता है। इस वर्ष जो मलमास आने वाला है, उसे काफी शुभ माना जा रहा है ये ऐसा शुभ संयोग मलमाल में 160 वर्ष बाद बन रहा है और इसके बाद ऐसा शुभ मलमास 2039 में आएगा।

वहीं अधिकमास में दो दिन पुष्य नक्षत्र भी पड़ रहा है। 10 अक्टूबर को रवि पुष्य और 11 अक्टूबर को सोम पुष्य नक्षत्र रहेगा। इस तारीख में कोई भी आवश्यक शुभ काम किया जा सकता है।

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भूलकर भी न करें ये काम
मलमास के समय में मांगलिक कार्यों जैसे कि विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश आदि की मनाही होती है। शुभ कार्य मलमास के समय में वर्जित होते हैं। हालांकि खरीदारी आदि की मनाही नहीं होती है।

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