Thursday, Jul 18, 2019

पश्चिम बंगाल में प्रचार में कटौती से भड़की ममता ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना

  • Updated on 5/15/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार में कटौती से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भड़क गई हैं। ममता ने चुनाव आयोग को उसके इस फैसले पर आड़े हाथ लिया है। सीएम ममता ने कहा कि बंगाल में अनुच्छेद 324 विद्यासागर की मूर्ति को तोड़ने को लेकर मोदी और शाह के लिए चुनाव आयोग की ओर से उपहार है। 

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उन्होंने कहा कि इस तरह का चुनाव आयोग कभी नहीं देखा, इसमें आरएसएस के लोग भरे पड़े हैं। ममता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की कोई समस्या नहीं है, अनुच्छेद 324 लगाना अप्रत्याशित, असंवैधानिक और अनैतिक है। 

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सीएम ने कहा कि चुनाव आयोग ने नहीं, बल्कि नरेंद्र मादी और अमित शाह ने गृह सचिव को हटाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को कोलकाता की हिंसा के लिए अमित शाह के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। 

चुनाव आयोग का फैसला समझ से परे : येचुरी 
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी हिंसा के मद्देनजर निर्धारित समय से एक दिन पहले चुनाव प्रचार प्रतिबंधित करने के चुनाव आयोग के फैसले को समझ से परे बताते हुये आयोग से पूछा है कि प्रचार पर रोक लगाने का समय राज्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैलियों के बाद क्यों निर्धारित किया गया है। 

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येचुरी ने बुधवार को आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुये कहा कि हिंसा के लिये जिम्मेदार भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं के खिलाफ आयोग ने कोई कार्रवाई करने के बजाय प्रचार पर रोक लगा दी। आयोग का यह फैसला समझ से परे है। 

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येचुरी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘एक दिन पहले प्रचार अभियान को रोकने का चुनाव आयोग का फैसला समझ से परे है। आयोग से अव्वल तो यह अपेक्षित था कि भाजपा और टीएमसी के अराजक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जाती। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गयी?’’ 

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उन्होंने कहा, ‘‘हमने पश्चिम बंगाल में हिंसा और कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के बारे में आयोग से कई बार शिकायत की, लेकिन आयोग से इस पर कोई प्रति उत्तर नहीं मिला।’’

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येचुरी ने प्रचार अभियान पर रोक लगाने के समय पर सवाल उठाते हुये कहा, ‘‘अगर प्रचार को 72 घंटे पहले ही प्रतिबंधित करना था तो प्रतिबंध का समय कल (बृहस्पतिवार) सुबह दस बजे तय क्यों नहीं किया गया? क्या यह प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों को आयोजित करने की छूट देने के लिये किया गया है?’’  

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