Tuesday, Jul 23, 2019

‘कमीशनखोरी के चक्रव्यूह में’ फंसी ममता बनर्जी की ‘तृणमूल कांग्रेस’

  • Updated on 7/9/2019

बंगाल में कई वर्षों से चला आ रहा ‘कट मनी’ का खेल समाप्त हो गया है। बंगाल में ‘कट मनी’ उस कमीशन को कहा जाता है जो सत्ताधारी दल के नेता स्थानीय क्षेत्र की कल्याणकारी परियोजनाओं के लिए स्वीकृत धनराशि में से अनौपचारिक कमीशन के रूप में लाभपात्रों से लिया करते थे। 

यह राशि कई मामलों में परियोजना की लागत का 25 प्रतिशत तक होती थी जो नीचे से लेकर ऊपर तक के वरिष्ठï नेताओं के बीच बांटी जाती थी। 

लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष (अब गृह मंत्री) अमित शाह ने बंगाल में यह मुद्दा उठाया था जिसके बाद ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की धूमिल होती छवि को बचाने के प्रयास में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकत्र्ताओं को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभपात्रों से ली गई ‘कट मनी’ की राशि उन्हें लौटा देने को कहा।
ममता का यह दाव उलटा पड़ा। इससे तृणमूल कांग्रेस के नेताओं द्वारा की जाने वाली जब्री वसूली का पर्दाफाश हो गया। विरोधी दलों को ममता बनर्जी के विरुद्ध इस्तेमाल के लिए एक राजनीतिक हथियार मिल गया और भाजपा ने इसके विरुद्ध आंदोलन छेड़ दिया।

यहां तक कि तृणमूल कांग्रेस के लोगों द्वारा विभिन्न सुविधाओं के बदले में लिए जाने वाले शुल्क की ‘रेट लिस्ट’ भी सामने आ गई है जिसके अनुसार अंतिम संस्कार तक के लिए 200 रुपए कमीशन लिया जाता था।  

अब आम जनता तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से अपने पैसे वापस मांग रही है। राज्यभर में ग्रामीण भूमिहीन किसानों से लेकर शहरों के व्यापारी तक तृणमूल कांग्रेस के लोगों द्वारा ली गई जब्री वसूली की पोल खोल रहे हैं और नित्य नए रहस्योद्घाटन हो रहे हैं। 

हुगली के ‘धनियाखाली’ गांव के लोगों ने कट मनी लेने के आरोप में तृणमूल कांग्रेस के दो नेताओं पर दो करोड़ रुपए जुर्माना लगाया है। उनका आरोप है कि ‘धनियाखाली’ ग्राम पंचायत के प्रधान और तृणमूल कांग्रेस की स्थानीय समिति के अध्यक्ष ने गरीबों के लिए आवास योजना के सैंकड़ों लाभाॢथयों से 15 हजार से लेकर 30 हजार रुपए तक की ‘कट मनी’ वसूल की थी।
हालांकि तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि उसकी पार्टी के सभी नेताओं में से मात्र 0.1 प्रतिशत नेता ही ऐसी गतिविधियों में शामिल हैं पर सच क्या है यह तो इस बारे विस्तृत व निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है। —विजय कुमार 

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