Sunday, Jan 19, 2020
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कोलकाता से दिल्ली पहुंची 'धरना' राजनीति, जानें PM बनने के लिए कितनी सक्षम हैं बंगाल की ममता

  • Updated on 2/13/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोलकाता में विपक्ष की रैली हो या सीबीआई के खिलाफ तीन दिन का धरना... ममता बनर्जी दिन-ब-दिन सुर्खियों में छाती जा रही हैं। आज पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली में संविधान और लोकतंत्र बचाओ रैली कर रही हैं। ये रैली दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा की जा रही है।

लोकसभा चुनाव के करीब आते-आते जहां कांग्रेस महागठबंधन के नाम पर विपक्ष को इकट्ठा कर रही है और बहुत हद तक राहुल को प्रधानमंत्री के दावेदारी के रूप में पेश कर रही है। उसी से उभरा थर्ड फ्रंट अब मजबूत होता नजर आ रहा है। अलग-अलग कई पार्टियों का साथ मिलने के बाद यूं तो ऐसे कई चेहरे नजर आ रहे हैं जो समय समय पर अपने आपको पीएम पद के लिए खड़ा कर रहे हैं लेकिन कुछ समय में सबसे चेहरा ममता बनर्जी साबित हो रही हैं। 

बीजेपी के खिलाफ खड़ा होने वाला महागठबंधन या थर्ड फ्रंट अगर मोदी को शिकस्त दे पाता है तो पीएम पद की उम्मीदवारी एक बड़ा सवाल बनकर सामने खड़ी है। ऐसे में थर्ड फ्रंट का उभरता नाम ममता बनर्जी इस पद के लिए कितनी सही साबित हो सकती हैं इस पर एक नजर डालते हैं।

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विपक्ष में बढ़ता कद

कलकत्ता में महारैली के लिए जुटी विपक्षी पार्टियां
ममता बनर्जी के आह्वान पर महारैली के लिए कलकत्ता में देशभर की विपक्षी पार्टियों का तांता लगा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडु, उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव, बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, शरद यादव और पूर्व पीएम एच डी देवेगौड़ा। इसके अलावा डीएमके प्रमुख स्टालिन, हेमंत सोरेन, कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी का भी साथ मिला। 

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सीबीआई की आड़ में सरकार की तानाशाही के खिलाफ धरना
चिटफंड घोटालों के सिलसिले में कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ की सीबीआई की कोशिश के खिलाफ धरने पर बैठीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बीच जबरदस्त टकराव की स्थिति पैदा हो गई। ममता ने जोर देकर कहा है कि मोदी सरकार ने ‘‘संविधान और संघीय ढांचे’’ की भावना का गला घोंट दिया। इस बीच, कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर ममता के समर्थन में उतर आई हैं।

इन ताजा दो मामलों ने ममता बनर्जी की छवि विपक्ष में मजबूत कर दी है। दोनों ही मामलों में ममता के साथ विपक्ष का एक बड़ा गुट साथ नजर आया। सीबीआई मामले में ममता को पूरे महागठबंधन का साथ मिला। इससे ममता की छवि मजबूत होने के साथ साथ वह पीएम पद की दावेदारी के लिए भी सटीक साबित हो रही हैं।

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अनुभव

वहीं, अगर हम अनुभव की बात करें तो किसी भी विपक्षी नेता की तुलना में ममता का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। पूर्व कांग्रेस नेता ममता बनर्जी 7 बार लोकसभा सांसद चुनी जा चुकी हैं। 1984 में वो पहली बार सासंद चुनी गई। उस समय राहुल सिर्फ 14 साल के थे। उनके संबंध पुरानी पार्टियों के नेताओं से अब भी अच्छे हैं। वहीं, अगर हम उनकी छवि की बात करें तो वह एक तेजतर्रार और मुखरता से बात रखने वाली नेता हैं।

मुखालिफ बातें

इसके अलावा अगर हम ममता के खिलाफ बातों पर नजर डालें तो महागठबंधन को इकट्ठा करने में और सरकार के खिलाफ मुखालिफ माहौल बनाने में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बड़ी भूमिका निभाई है। इसके बाद उन्हें तीन राज्य में जीत और बीजेपी को हार का सामना भा करवाया है। जिसके बाद विपक्ष का बड़ा गुट राहुल के साथ भी मौजूद है। राहुल गांधी को पीएम की दावेदारी के लिए दावा डीएमके चीफ स्टालिन का समर्थन भी मिल चुका है। अब सारी बात चुनाव में पार्टी की जीत के प्रदर्शन पर टिकती नजर आ रही है। जिसके लिए महागठबंधन और थर्ड फ्रंट जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं।

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