Thursday, Jul 18, 2019

प. बंगाल में सरकार बदली लेकिन हालात नहींः 'दीदी' ने किया था लेफ्ट के खिलाफ खूनी संघर्ष

  • Updated on 5/15/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देशभर में चुनावी माहौल के साथ पश्चिम बंगाल हिंसा की आग में जल  रहा है। बंगाल में हिंसा की बात नई नहीं है। पिछले काफी समय से बंगाल की धरती पर रक्तपात होता रहा है। सरकारें बदल जाती हैं लेकिन हालात बदस्तूर ही रहे। इसी बीच चुनावी माहौल में भारतीय जनता पार्टी और टीएमसी खुलकर आमने सामने आ गए हैं।

मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को रोड शो में हंगामें के बाद हिंसा हुई। इसके अगले दिन बुधवार को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की रैली होनी थी। जिससे पहले उनके मंच को तोड़ दिया गया। इसके सात ही मंच को तैयार करने वाले मजदूरों के साथ मारपीट भी गई। 

पश्चिम बंगाल का चुनावी और सियासी फिजा जमाने से खून से रंगा रहा है। सबसे पहले इसकी कहानी 1960 के दशक में सत्ता पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए कांग्रेस और लेफ्ट के बीच खूनी संग्राम देखा गया। हालांकि जब साल 1977 के दौरान ज्योति बसु के नेतृत्व में कांग्रेस का किला ढहाने के बाद लेफ्ट फ्रंट की सरकार बनी तो धीरे- धीरे कांग्रेस सिमटती चली गई। 

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लेफ्ट सरकार में जमकर हुईं हिंसा...

1977 से 2007 के बीच करीब 34 साल राज्य में लेफ्ट की सरकार का दबदबा रहा। ज्योति बसु से लेकर बुद्धदेव भट्टाचार्जी तक लेफ्ट फ्रंट के शासन में भारी हिंसा देखने को मिली। इन 34 सालों में करीब 28 हजार राजनीतिक हत्याएं हुईं। ममता बनर्जी ने वामपंथ के शासन के खिलाफ जमकर लड़ाई लड़ी। वे पहले कांग्रेस में होते हुए ही सघर्ष करती रहीं। हालांकि इसके बाद उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बना लिया। ममता ने लेफ्ट खिलाफ युद्ध स्तर पर लड़ाई लड़ी। एक दिन ममता बनर्जी कहती थीं कि बंगाल लेफ्ट की हिंसा की आग में जल रहा था। हालांकि उनकी सरकार में भी हालात वही बने रहे। 

हत्याओं के आंकड़े...

21वीं सदी में मामला कांग्रेस से हटकर टीएमसी और लेफ्ट के बीच आ पहुंचा था। जिसमें काफी रक्तपात देखने को मिला। पश्चिम बंगाल में लेफ्ट राज में 2001 में 21, 2002 में 19, 2003 में 22, 2004 में 15, 2005 में 8, 2006 में 7, 2007 में 20, 2008 में 9 राजनीतिक हत्याएं हुईं, लेकिन ये आंकड़ा अचानक 2009 में बढ़ गई जब राजनीतिक हत्याओ की गिनती पचास तक पहुंच गई। 2010 में ये संख्या थोड़ी घटी लेकिन 38 तक रही।

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ममता सरकार के बाद...

ममता बनर्जी बंगाल में हो रही हिंसा को लेकर लगातार राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार के खिलाफ संघर्ष की लड़ाई लड़ती रहीं। लेकिन ममता की सरकार आते ही स्थिति और बदहाल होती चली गई। साल 2011 में ममता ने लेफ्ट का किला ध्वस्त करके अपना परचम लहराया। हालांकि इसके बाद 2011 में ही 38 2012 में 22, 2013 में 26, 2014 में 10, 2015 में एक और 2016 में एक राजनीतिक हत्या हुई।

अगर हम लेफ्ट शासन और ममता सरकार के कार्यकाल के बीच की घटनाओं की तुलना करें तो लगता है कि ममता सरकार में हिंसा कुछ कम हुई हैं। हालांकि बीजेपी लगातार आरोप लगाती रही है कि उनकी सरकार में राज्य हिंसा की आग में जल रहा है। हालांकि पिछले कुछ समय में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की  है। 2019 के चुनाव में सबसे ज्यादा लोगों की नजरें किसी राज्य पर टिकी रहीं तो वो पश्चिम बंगाल ही है


 

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