Sunday, Feb 23, 2020
Mamta Banerjee warns non BJP state government do not implement NPR in haste

ममता बनर्जी ने गैर बीजेपी राज्य सरकार को चेताया, जल्दबाजी में एनपीआर को नहीं करें लागू

  • Updated on 1/20/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की सीएम ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) ने गैर भाजपा शासित राज्यों के सीएम को सुझाव दिया है कि एनपीआर पर जल्दबाजी में निर्णय नहीं लें। उन्होंने कहा है कि एनपीआर फॉर्म, इसके सवालों और मानदंडों का सावधानी से अध्ययन करें।  उन्होंने एनपीआर को मोदी सरकार का खतरनाक खेल बताया है। बनर्जी ने सीधे तौर पर कहा कि  माता-पिता के जन्मस्थान का विवरण और निवास का सबूत मांगने वाला फॉर्म कुछ और नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के क्रियान्वयन का पूर्व संकेत है।     

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एनपीआर का गहराई से अध्ययन करना जरुरी

पश्चिम बंगाल के सीएम ने कहा कि  भाजपा शासित पूर्वोत्तर-त्रिपुरा,असम, मणिपुर और अरुणाचल तथा विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों, सरकारों से अपील करूंगी कि वे निर्णय पर पहुंचने से पहले कानून को ठीक तरह से पढ़ें और एनपीआर फॉर्म के विवरण खंडों का संज्ञान लें। उन्होंने आशंका जाहिर करते हुए कहा कि माता-पिता के एनपीआर फॉर्म में जन्मस्थान से जुड़ा कॉलम भरना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि यह अनिवार्य नहीं है तो फिर इस कॉलम को फॉर्म में क्यों रखा गया है? इन सवालों को हटाने का प्रयास किया जाना चाहिए।     

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नागरिकता कानून के खिलाफ विधानसभा में लाएगी ममता प्रस्ताव

उन्होंने कहा कि यदि यह कॉलम फॉर्म में बरकरार रहता है तो ऐसे में माता-पिता का जन्म विवरण न भरने वाले अपने आप बाहर हो जाएंगे। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ जल्द ही प्रस्ताव पारित करेगी। उन्होंने कहा कि हम पूर्व में एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुके हैं। अब तीन से चार दिन के भीतर विधानसभा में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रस्ताव आएगा।  एनपीआर पर केंद्र द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल न होने के अपने निर्णय को उचित ठहराते हुए बनर्जी ने कहा कि वह इसमें शामिल न होने वाली एकमात्र व्यक्ति होकर खुश हैं। बनर्जी ने खुद को आम आदमी की संरक्षक करार देते हुए कहा कि वह पश्चिम बंगाल में एनपीआर और एनआरसी लागू नहीं होने देंगी।    

 

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