Tuesday, Oct 19, 2021
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Mamta came to Congress on Bengal CM what is its political meaning ALBSNT

बंगाल की सीएम पर कांग्रेस को आई ममता, आखिर क्या है इसके सियासी मायने ?

  • Updated on 9/9/2021

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। पश्चिम बंगाल में कुछेक दिनों में उपचुनाव होने है। हालांकि बीते दिनों ही राज्य में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी जब चरम पर थी तब बीजेपी और टीएमसी के बीच जबरदस्त मुकाबला नजर आ रहा था। हालांकि चुनाव बाद भी तल्खी दोनों दलों के बीच कम होती नजर नहीं आ रही है। लेकिन इस बीच एक अहम बदलाव तब देखा गया जब कांग्रेस और टीएमसी करीब होते नजर आ रहे है। 

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बीते विधानसभा चुनाव में ममता का फिर से बजा डंका

दरअसल मई में संपन्न विधानसभा चुनाव में जहां टीएमसी और बीजेपी में कड़ा मुकाबला था तो कांग्रेस और लेफ्ट पार्टी गठबंधन करके  ममता को हराने के लिये उम्मीदवार भी उतारे थे। यहीं नहीं उस समय तक कांग्रेस और लेफ्ट पार्टी भी बीजेपी की तरह ममता बनर्जी की सरकार को उखाड़ फेंकने की वकालत करते फिरते थे। लेकिन हालात वो अब नहीं है। बंगाल की फिजा में भले ही बीजेपी का कद बढ़ गया हो लेकिन ममता की दुर्ग किलेबंदी को भेद करने की क्षमता किसी भी विपक्षी दलों में नहीं है। कम से कम हाल के संपन्न विधानसभा चुनाव तो यहीं दर्शाता है।

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मोदी के खिलाफ माहौल को भुनाने की कोशिश में कांग्रेस

वहीं देश में मोदी सरकार के खिलाफ जबरदस्त माहौल बनाने की फिराक में कांग्रेस जुट गई है। कांग्रेस यह बात समझ चुकी है कि साल 2024 में मोदी के खिलाफ उपजे माहौल को बरकरार तभी रखा जा सकता है जब विपक्ष एकजुट रहेगा। दूसरी तरफ ममता बनर्जी को भवानीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में हर हाल में जीत हासिल करना होगा। तभी सीएम पद पर बरकरार रह सकेगी। हालांकि ममता के लिये ज्यादा मुश्किल नहीं है। लेकिन नंदीग्राम के चुनाव में ममता को जब हार का सामना करना पड़ा तब से अब वे फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहती है।

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भवानीपुर सीट पर होने है उपचुनाव 

ममता को तब काफी राहत मिली जब कांग्रेस ने घोषणा की भवानीपुर सीट से पार्टी कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा। लेकिन बदले में कांग्रेस भी आगामी लोकसभा चुनाव में ममता का साथ मजबूती से समर्थन की अपेक्षा रखती है। अब देखना होगा कि कांग्रेस और ममता के बीच जो सियासी खिचड़ी पक रही है उसमें वामदलों के लिये क्या भूमिका रहेगा? माना जा रहा है कि वामदल ने मन बना लिया है कि ममता के खिलाफ भवानीपुर उपचुनाव में उम्मीदवार देकर सीएम के लिये थोड़ी बहुत मुश्किल पैदा करके राज्य की सियासी हवा का रुख देखेगी। ताकि निकट भविष्य में वामदलों को फैसला लेने में आसानी हो सकें।

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