Saturday, Jul 21, 2018

सावधान! आपके निजी पलों का वीडियो और स्क्रीनशॉट बना सकते हैं कई एप

  • Updated on 7/11/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। स्मार्टफोन के बढ़ते हुए प्रचलन के चलते आजकल लोग अपना अधिकतर समय मोबाइल फोन ही बिताने लगे है। ऐसे में यह जानना बेहद जरुरी हो जाता है कि मोबाइल पर आप जो भी कुछ कर रहें हैं वो कितना सु​रक्षित है। इसी बारें में अमेरिका कि यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन से मिली जानकारी के अनुसार चौकानें वाले तथ्य सामने आए है।

जी हां इस बात की पुख्ता जानकारी मिली है कि कई जानीमानी स्मार्टफोन एप आपकी जानकारी के बिना ही आपके क्रियाकलापों का वीडियों और स्क्रीनशॉट बनाकर किसी दूसरी कंपनी के पास भेज सकती हैं। ये काम इतना आराम से होता कि यूजर्स को कानो कान भनक तक नहीं लग पाती।

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सुरक्षित नहीं आपकी पर्सनल डिटेल

युनिवर्सिटी ने अपने अध्ययन के आधार दावा किया कि ऐसे वीडियों और स्क्रीनशॉट में आपका यूजर नेम, पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर समेत कई महत्वपूर्ण जानकारियां हो सकती है। यूजर की अनु​मति के बिना हासिल की गई ये जानकारियां निजता के हनन के अलावा भी कई अन्य तरह की समस्याओं को जन्म दे सकती हैं।

यह अध्ययन इस बात को जांचने के लिए किया गया था कि कही स्मार्टफोन एप यूजर की चैट रिकॉर्ड तो नहीं करते। क्योंकि इस तरह की आशंकाए जताई जा चुकी थीं कि कुछ चर्चित एप चुपचाप यूजर्स की चैट को रिकार्ड करके उन कंपनियों को बेच देते हैं जो इस चैट के आधार पर यूजर्स को विज्ञापन भेजने का काम करती हैं।

हालांकि चैट रिकॉर्ड करने जैसे सुबुत तो सामने नहीं आ सके लेकिन युनिवर्सिटी ये पकड़ने में कामयाब रही कि ऐसी कई एप्स मौजूद है जो ​वीडियों और स्क्रीनशॉट लेने जैसे काम में लगी हुई हैं। इसमें भी सोशल मीडिया के बढ़ते हुए प्रभाव के कारण अब यूजर्स की तमाम प्रोफेशनल और पर्सनल गतिविधियां भी मोबाइल फोन पर होने लगीं हैं। 

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पासवर्ड भी सुरक्षित नहीं

अध्ययन से जुड़े एक प्रोफेसर ने बताया कि वे कुछ ही सुराग खोजने के लिए ये रिसर्च कर रहे थे लेकिन उनको बदले में इतने ज्यादा सुराग मिले कि वे हैरान है। कई एप्स तो पलक झपकते ही पासवर्ड का स्क्रीनशॉट ले लेती है। यह बेहद गंभीर समस्या है।

बता दें कि इस अध्ययन के लिए कुल 17 हजार एप्स की निगरानी की गई थी जिनमें से 9 हजार एप्स वीडियों और स्क्रीनशॉट लेने जैसी गतिविधियों में लिप्त पाई गई। हालांकि इस अध्ययन में केवल एंड्रॉयड एप ही शामिल की गईं थी लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है ​ऐसा दूसरे आॅपरेटिंग सिस्टम में भी होना संभव है।

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