Sunday, Oct 02, 2022
-->
Martyred Shankar''s mortal body seeing the body wrapped in the tricolor cried village prshnt

शहीद शंकर का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर देखकर बदहवास हुए परिजन, फूट-फूट कर रोया गांव, Photos

  • Updated on 5/4/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। जम्मू कश्मीर (Jammu kashmir) के बारामुला के उरी में शुक्रवार को हुए आतंकी हमले में शहीद हुए उत्तराखंड के जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचाया गया। 21 साल के जवान नायक शंकर सिंह के कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात थे। नायक शंकर सिंह का घर गंगोलीहाट ब्लॉक के नाली गांव में है। जहां उनका पार्थिव शरीर पहुंचने के दौरान जवान को तिरंगे में लिपटा देख पूरा गांव फूट-फूटकर रो पड़ा। वहीं पूरे गांव में भारत माता के नारे की गूंज फैल गई।

10 दिन पैदल चलने के बाद महिला ने रोड पर दिया बेटी को जन्म, कई दिनों से नहीं खाया खाना

माता-पिता हुए बदहवास
शहीद शंकर सिंह के गांव नाली में उनके माता-पिता, पत्नी और 6 साल का बेटा रहता है। बेटे शंकर की शहादत की खबर सुनने के बाद माता-पिता समेत पूरा गांव बदहवास है। शनिवार को शंकर के पार्थिव शरीर को हेलीकॉप्टर से गंगोलीहाट तहसील के दसाईथल हेलीपैड पर लाया गया, जिसके बाद उन्हें पैतृक गांव ले जाया गया। जिसके बाद शाम के समय शंकर का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सभी लोगों की आंखें नम थी।

कोरोना से डरकर मरने वालों की संख्या पहुंची 328, 80 लोगों ने किया आत्महत्या

सैन्य पृष्ठभूमि परिवार से थे शहीद शंकर सिंह
शंकर की शहादत की खबर सुनकर घर में माता पिता और पत्नी समेत सभी परिवार जनों का बुरा हाल है। वहीं उनके 6 साल के छोटे बेटे हर्षित को पिता की शहादत के बारे में जानकारी नहीं है उसे अभी यह नहीं पता कि उसके पिता अब नहीं लौटेंगे। बता दें कि सीमा रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शंकर सिंह का परिवार सैन्य पृष्ठभूमि का ही है। शहीद शंकर सिंह के दादा भगवान सिंह ने द्वितीय विश्व युद्ध लड़ा था और शंकर सिंह के पिता ने भी सेना को ही चुना और राष्ट्रीय राइफल में भर्ती हुए। जिसके बाद उन्होंने वर्ष 1995 में सेवानिवृत्ति ले ली।

Coronavirus: त्रिपुरा में फिर लौटा संक्रमण, BSF के 12 जवान पाए गए पॉजिटिव, राज्य में कुल 16 मामले

जनवरी में ही छुट्टी लेकर घर आए थे शंकर
दादा और पिता के नक्शे कदम पर शंकर सिंह ने और उनके छोटे भाई नवीन सिंह ने देश सेवा को ही अपना लक्ष्य बना लिया। छोटा भाई फिलहाल कुमाऊं रेजिमेंट में जम्मू कश्मीर में तैनात है।

परिवार वालों ने बताया कि शंकरसिंह जनवरी में ही छुट्टी लेकर घर आए थे। जिसके बाद एक माह की छुट्टी बीतने पर फरवरी में यूनिट लौट गए। इससे पहले वे महाकाली मंदिर में सेना की ओर से किए गए धर्मशाला के निर्माण के दौरान भी आए थे।

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें

comments

.
.
.
.
.