भारतीय रेलगाड़ियों में हत्या और लूटमार की घटनाओं में भारी वृद्धि

  • Updated on 1/19/2019

हम सबकी जीवन रेखा कहलाने वाली भारतीय रेलों में यात्रा करना अब खतरे से खाली नहीं रहा। बुधवार-वीरवार की रात जिस तरह टाटा-मूरी-जम्मू तवी और दुरंतो में लूटपाट की घटनाएं हुई हैं उससे कम से कम इस बात की पुष्टिï होती है कि अब भारतीय रेलों में यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है। 

रेलों में बड़ी संख्या में सामने आ रहे लूटमार, हत्या, डकैती और बलात्कार के मामलों में रेलवे व सुरक्षा बलों के सदस्यों की लापरवाही भी पाई जा रही है जिसके मात्र तीन सप्ताह के उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

28 दिसम्बर, 2018 को सिलीगुड़ी रेलवे स्टेशन पर खड़ी डी.एम.यू. पैसेंजर गाड़ी में बदमाशों ने एक यात्री से मोबाइल व नकदी छीनने के बाद उसके साथ बुरी तरह मारपीट की। 

30 दिसम्बर को छपरा-वाराणसी रेल खंड के रेवती स्टेशन के निकट  दुर्ग से छपरा जा रही सारनाथ एक्सप्रैस में सशस्त्र डकैतों ने स्लीपर बोगी में घुस कर यात्रियों से लूटपाट की और विरोध करने पर आधा दर्जन यात्रियों को मारपीट कर घायल कर दिया।

5 जनवरी, 2019 को जींद जा रही पैसेंजर ट्रेन में भैंसवान स्टेशन से गाड़ी में सवार 7-8 युवकों ने यात्रियों के साथ मारपीट व लूटपाट शुरू कर दी। उन्होंने एक यात्री पर बर्फ तोडऩे वाले सूए से वार कर उसे घायल कर दिया तथा एक महिला के आभूषण छीनने के बाद उसे चलती गाड़ी से धक्का दे दिया। यात्रियों को लूटने के बाद वे गोहाना स्टेशन पर उतर कर फरार हो गए।

8 जनवरी को भुज-दादर सायाजी नगरी एक्सप्रैस द्वारा अहमदाबाद जा रहे गुजरात भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष जयंती भानुशाली की अज्ञात नकाबपोश हमलावरों ने ट्रेन में गोली मार कर हत्या कर दी। 

09 जनवरी को नई दिल्ली से भागलपुर जा रही साप्ताहिक एक्सप्रैस को लगभग 24 डकैतों ने दैताबांध के निकट चेन खींच कर रोक लिया और चालक व गार्ड को कब्जे में लेकर लगभग आधा दर्जन बोगियों में 40 मिनट तक लूटपाट करते हुए यात्रियों से लगभग 30 लाख रुपए मूल्य का सामान लूट लिया। इसे अब तक की सबसे बड़ी रेल डकैती माना जा रहा है। उन्होंने 5 यात्रियों को पीट कर घायल कर दिया और महिलाओं से दुव्र्यवहार किया।

13 जनवरी को अज्ञात अपराधियों ने बिहार के मधेपुरा में कोशी एक्सप्रैस  में यात्रा कर रहे एक यात्री को लूट लिया और विरोध करने पर चलती ट्रेन से धक्का देकर नीचे फैंक दिया जिससे वह गंभीर घायल हो गया। 
दरअसल 17 जनवरी को हुई घटनाएं भयावह ही थीं। पहली घटना में रात 2 बजे बदमाशों ने तेजधार हथियार और पिस्तौल दिखाकर बादली-होलम्बी कलां रेलवे स्टेशन के बीच टाटा-मूरी-जम्मू तवी ट्रेन के यात्रियों को निशाना बनाया और उनसे नकदी, मोबाइल फोन, गहने आदि छीन लिए। 

दूसरी घटना में लुटेरे तड़के 4.30 बजे समाएपुर बादली रेलवे स्टेशन के निकट सिग्नल फेल कर जम्मू-दिल्ली दुरंतो ट्रेन के कोच बी-3 के कम से कम 12 यात्रियों के मोबाइल, कैश और गहने-कपड़े आदि लूट कर फरार हो गए। गाड़ी रोक कर जिस स्थान पर यह वारदात की गई, रेलवे की पुलिस चौकी वहां से कुछ ही दूरी पर है। लोगों ने बताया कि घटना के दौरान यात्री चिल्लाते रहे लेकिन कोई भी सुरक्षा कर्मी सहायता के लिए नहीं पहुंचा। 

रेलवे में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाली ये तो वे घटनाएं हैं जो जानकारी में आई हैं, इनके अलावा भी न जाने कितनी घटनाएं हुई होंगी। तय है कि रात्रिकालीन गाडिय़ों में सुरक्षा के विशेष प्रबंध न किए गए तो इस तरीके से घटनाएं होती ही रहेंगी और चूंकि अधिकांश घटनाएं रात को ही हुई हैं अत: रात्रिकालीन गाडिय़ों में सुरक्षा के विशेष प्रबंध करने की आवश्यकता है।

ताज्जुब तो यह भी है कि 17 जनवरी वाली घटना से एक दिन पहले ही यह सुझाव आया था कि रेलगाडिय़ों में होने वाली घटनाओं की शिकायत ‘ऑनलाइन’ दर्ज करने की व्यवस्था हो ताकि पीड़ित रेलयात्रियों को अपनी शिकायत दर्ज करवाने के लिए रेलवे पुलिस के थाने में न जाना पड़े। 

गृह मंत्री राजनाथ सिंह की सहमति के बाद रेलवे सुरक्षाबल के महानिदेशक अरुण कुमार मिश्र ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है लेकिन योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अभी रेलवे को काफी कुछ करना पड़ेगा और हर हाल में वी.वी.आई.पी. गाडिय़ों के अलावा अन्य महत्वपूर्ण गाडिय़ों में भी सतर्क पुलिस कर्मियों की तैनाती करनी होगी जो सिर्फ डिब्बों में आराम से सोने की बजाय रेलों में गश्त करके अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभाएं।                    —विजय कुमार 

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