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mathematician vashistha narayan singh is no more breathed his last at pmch

नहीं रहे गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह, पीएमसीएच में ली अंतिम सांस

  • Updated on 11/14/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बिहार (Bihar) के गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह (Vashistha Narayan Singh) का आज सुबह निधन हो गया है। वे काफी दिनों से पीएमसीएच में भर्ती थे। देश के महान गणितज्ञों में शुमार वशिष्ठ नारायण सिंह मानसिक बीमारी से पीड़ित थे। वे सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित थे। उनके असमय निधन पर पूरा बिहार आज गमगीन हो गया है। सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) समेत सभी दलों के नेताओं ने वशिष्ठ नारायण के निधन पर गहरा शोक जताया है। पूर्व सीएम जीतन राम मांझी (Jitan Ram Mnjhi) ने कहा है कि यह बिहार के लिये बहुत बड़ी क्षति है। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। लेकिन जिस तरह से महान गणितज्ञ के मरने के बाद शव को एबुलेंस भी नहीं नसीब हुआ उससे राज्य सरकार की फिर से कलई खुल गई है। हालांकि राज्य सरकार ने फजीहत को देखते हुए वशिष्ठ नारायण का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार की घोषणा की है।

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वशिष्ठ नारायण 40 साल से गंभीर बिमारी से थे पीड़ित
मालूम हो कि वशिष्ठ नारायण सिंह ने 74 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। हालांकि वे गत 40 साल से गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित थे। वे अपने परिवार के साथ ही पटना के कुल्हरिया काम्पलेक्स में रहते थे। अचानक उनका स्वास्थ्य बिगड़ा तो परिवार वालों ने आनन-फानन में पीएमसीएच में भर्ती किया। जहां डॉक्टरों की टीम ने उन्हें मृत घोषित किया। 
 
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आंइस्टीन के सापेक्षकता के सिद्धांत पर उठाया सवाल
वशिष्ठ नारायण सिंह उस समय चर्चा में आए जब उन्होंने महान वैज्ञानिक आंइस्टीन के सापेक्षकता के सिद्धांत पर सवाल उठाया था। उन्होंने नासा से अपोलो की लांचिंग के समय भी अपने हुनर का लोहा दुनिया भर में मनवाया जब 31 कंप्यूटर अचानक बंद हुए तो उन्होंने जो आंकड़ा पेश किया वो बाद में सटीक निकला। पटना कॉलेज के छात्र के तौर पर ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। उसी समय कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन कैली उनसे विशेष अनुरोध कर उन्हें अमेरिका ले गए।

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