Monday, Jan 21, 2019

एम.बी.ए. डिग्री प्राप्त भी करने लगे ‘छोटी नौकरियों’ के लिए आवेदन

  • Updated on 12/25/2018

बेरोजगारी आज हमारे देश की बड़ी समस्या बन चुकी है तथा देश में 3 करोड़ से अधिक युवक बेरोजगार हैं। वर्ष 2014 में लोकसभा के चुनाव के समय नरेन्द्र मोदी ने युवाओं के लिए 1 करोड़ नौकरियां सृजित करने का वायदा किया था, जो अभी तक पूरा नहीं हो सका। 

‘स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2018’ की रिपोर्ट के अनुसार इस समय पिछले 20 वर्षों में देश में बेरोजगारी उच्च स्तर पर है तथा यहां काफी संख्या में लोग इतना भी नहीं कमा पा रहे जिससे जीवन गुजार सकें, इसीलिए लोगों का झुकाव सरकारी नौकरियों की ओर बढ़ रहा है।

हालत यह है कि चपड़ासी, जेल वार्डर, माली, बेलदार, कांस्टेबल आदि तुलनात्मक दृष्टिï से कम शैक्षिक योग्यता वाले पदों के लिए अत्यंत उच्च योग्यता अर्थात एम.बी.ए., इंजीनियर, पीएच.डी., पोस्ट ग्रैजुएट, ग्रैजुएट आदि के डिग्री धारी आवेदन कर रहे हैं। 

इसका नवीनतम उदाहरण अभी हाल ही में महाराष्टï्र पुलिस द्वारा 1449 कांस्टेबलों की भर्ती के दौरान सामने आया जिसके लिए वांछित बुनियादी शैक्षिक योग्यता हायर सैकेंडरी (एच.एस.सी.) अथवा 12वीं कक्षा उत्तीर्ण है।

इनके लिए आवेदन करने वालों में लगभग 109 एम.बी.ए., 1978 एम.ए., 543 एम.कॉम., 423 इंजीनियर, 5 वकील, 27063 बी.ए., 6701 बी.कॉम. और 4698 बी.एससी. ग्रैजुएट शामिल थे।

उपरोक्त घटनाक्रम देश में रोजगार की स्थिति का डरावना दृश्य पेश करता है लेकिन इसका एक अन्य पहलू भी सामने आ रहा है कि पुलिस विभाग में अब पहले की तुलना में पढ़े-लिखे लोग आ रहे हैं। 

अतीत में जहां अधिकांश पुलिस कर्मियों की जुबान पर अपशब्द चढ़े रहते थे वहीं अब पुलिस कर्मचारी और अधिकारी थाने में आने वाले लोगों से शिष्टïतापूर्ण  व्यवहार करते हैं जिससे विभाग में कुछ शुचिता भी आई है। 

इसी कारण अब कुछ लोग पुलिस कर्मियों को सम्मानित भी करने लगे हैं। बेशक यह एक अच्छा बदलाव है परन्तु इससे देश में बेरोजगारी की समस्या की गंभीरता कम नहीं हो जाती। 

देश के प्राय: सभी राज्यों में पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोजगारी बड़ी समस्या बन चुकी है जिसे दूर करने के लिए केन्द्र व राज्य सरकारों को रोजगार के अधिक से अधिक मौके सृजित करने के अलावा युवाओं को स्वरोजगार में खपाने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं शुरू करनी चाहिएं।                                                                                                      —विजय कुमार

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