Wednesday, May 18, 2022
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#MeToo: पत्रकारिता जगत में भी हो रहा महिलाओं का उत्पीड़न, क्यों इस मुद्दे चुप है मीडिया

  • Updated on 10/13/2018

नई दिल्ली/आयुषी त्यागी।  #MeToo शायद ही ऐसा कोई इंसान हो जो इस कैंपेन के बारे में ना जानता हो। देश में  मी टू कैंपेन की ऐसी लहर चली है जिसमें एक-एक कर बॉलीवुड जगत से लेकर मीडिया संस्थानों की बड़ी -बड़ी हस्तियों को कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। इस कैंपेन ने एक बात तो साफ कर दी है कि किस कदर हमारे समाज में गंद फैला हुआ है। सबसे पहले तो हमे ये समझने की जरूरत है कि आखिर यौन उत्पीड़न और सहमति मैं क्या अंतर है।  

किसी महिला के साथ अगर आप उसकी सहमति से संबंध बनाते है तो ये उत्पीड़न नहीं है लेकिन अगर वहीं सहमति जबरदस्ती में बदल जाए तो वो उत्पीड़न है। अगर आप बार-बार किसी महिला को दोस्ती करने के लिए मजबूर करते है तो ये भी एक तरह का मानसिक उत्पीड़न ही है। हमें सबसे पहले ये सिखने की जरुरत है कि महिलाओं की हां और ना दोनों का हमेशा सम्मान किया जाए।

#MeToo उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के साथ महिलाओं को होनी चाहिए इस कानून की जानकारी

चलिए तो मैं मी टू के बारे में बात कर रही थी उसी की तरफ रुख करते हैं। बॉलीवुड में आपने कई ऐसी हस्तियों के नाम सुने है जिनपर मी टू के तहत आरोप लगाए गए है। इन सभी बातों की जानकारी जो आप तक पहुंचा रहे है क्या उस क्षेत्र में महिलाओं के साथ उत्पीड़न करने वालों के बारे में आपने कुछ सुना। दरअसल पत्रकारिता जगत में भी कई ऐसी महिलाएं है जिन्होंने अपने साथ हुई उत्पीड़न की आपबीती सुनाई है। हम आपको उन सभी से रूबरू करवाते है जिनपर मी टू की कालिख लग चुकी है और इस पर मीडिया जगत क्या सोचता है।

अंग्रेजी पत्रकारिता की बात करें तो अखबार से लेकर बेवसाइट तक सब मी टू कैंपेन के बारे में लिख रहे है वहीं हमारी हिंदी पत्रकारिता इस पर मौन धारण किए बैठी है। हालांकि वो इसपर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए नहीं है वो आप तक सारी खबरें तो पहुंचा रहे है लेकिन इस पर उनका क्या नजरिया है वो अभी तक खुलकर सामने नहीं आया है। एक पत्रकार की का हथियार उसकी कलम होती है उसकी कलम मैं ऐसी ताकत है कि वो समाज में एक बदलाव ला सकती है लेकिन इसस मुद्दे पर कहीं ना कहीं ये कलम भी कमजोर साबित हो रही  है। 

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पत्रकारिता जगत की वो महिलाएं जिन्होंने अपने साथ हुए उत्पीड़न के खिलाफ उठाई आवाज

जब इंटरव्यू लेने गई महिला पत्रकार के साथ कैलाश खैर ने की बदसलूकी 
#MeToo कैंपेन के जरिए नताशा हेमरजानी नाम की एक महिला पत्रकार ने कैलाश खेर पर गलत तरह से छूने का आरोप लगाया है। पेशे से फोटो पत्रकार नताशा हेमरजानी ने कई सारे ट्वीट्स कर विस्तार में अपनी आपबीती साझा की है। उन्होंने बताया कि उनके साथ घटी यह घटना 2006 की है, जब वे अपनी एक साथी महिला पत्रकार के साथ कैलाश के घर उनका इंटरव्यू लेने गई थीं। उन्होंने बताया कि तब उनकी हिन्दुस्तान टाइम्स, मुंबई में फोटोग्राफर के तौर पर नई-नई जॉइनिंग हुई थी। उन्हें अपनी एक साथी महिला पत्रकार के साथ कैलाश के घर उनका इंटरव्यू लेने के लिए भेजा गया था। कैलाश खेर के अलावा महिला फोटो जर्नलिस्ट ने मॉडल जुल्फी सैयद पर भी कुछ ऐसे आरोप लगाए हैं।

कैलाश पर दूसरा आरोप
 मस्कट की एक विदेशी महिला पत्रकार ने भारतीय पत्रकार संध्या मेनन को एक संदेश भेजकर बताया कि कैलाश खेर ने उनके साथ गलत किया है। संध्या ने महिला का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए इस मामले पर अपनी आवाज को बुलंद की है। विदेशी जर्नलिस्ट ने संध्या मेनन को मैसेज में बताया- काश! मेरी इतनी हिम्मत होती कि मैं अपना नाम जाहिर कर सकूं, लेकिन मैं आपको कैलाश खेर के साथ अपने #Metoo मूवमेंट के बारे में बताना चाहती हूं। 

पत्रकार केतकी जोशी
पीयूष मिश्रा का नाम भी इसके तहत सामने आया है। पत्रकार केतकी जोशी ने पीयूष पर इल्ज़ाम लगाया है कि  2014 में उनके दोस्त के घर एक पार्टी में गई थी जहां पीयूष चीफ गेस्ट थे।  केतकी उनकी फेन थीं, घर की छत पर वो एक कोने में खड़ी हुई थीं, उन्हें देखकर पीयूष मिश्रा ने अपने पास बुलाया पहले तो उन्हें बहुत अच्छा लगा वो उनकी फेन थीं, उनके लिए ये सपने जैसा था, पीयूष ने उन्हें बगल में आकर बैठने के लिए कहा। पार्टी जैसे ही खत्म हो रही थी केतकी जैसे ही पीयूष के पास से गुजरी तो उन्होंने केतकी का हाथ पकड़ लिया।

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एम जे अकबर 
मशहूर पत्रकार गज़ाला वहाब ने भी एम. जे. अकबर पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ‘द वायर’ में एक आर्टिकल लिखा जिसमें बताया कि किस तरह से उन्हें ‘एशियन ऐज' में काम करते हुए एम जे अकबर की सोच का शिकार होना पड़ा था उस वक्त वो वहां एडिटर हुआ करते थे।

बुधवार को एक अंग्रेजी अखबार की स्थानीय संपादक सुपर्णा शर्मा ने आरोप लगाया है कि 1990 में अखबार की लॉन्चिंग के मौके पर अकबर ने उनके साथ बदसलूकी और आपत्तिजनक हरकत की थी। सुपर्णा के अनुसार, तब वह एमजे अकबर की टीम का हिस्सा थीं। बता दें कि अभी तक 9 महिलाएं एम जे अकबर पर इस तरह के आरोप लगा चुकी है।

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क्यों पत्राकिरता में आसानी से शिकार हो जाती है महिलाएं
हिंदी पत्रकारिता से जुड़ी कई महिलाओं ने न्यूज लॉन्ड्री की एक स्टोरी में अपना-अपना अनुभव साझा किया है।  जिसमें उन्होंने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न का जिक्र किया है। कई पत्रकारों के खुद मानना है कि  हिंदी पत्रकारिता में चापालूसी वाला माहौल है। साथ ही यहां सबसे बडी और महत्वपूर्ण शर्त ये है कि यहां महिलाओं को कमजोर होना जरुरी है। न्यूज चैनलों की बात करे तो यहां भी बॉस की मनमर्जी और पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या कम होना भी उन्हें इस तरह के घटनाओं का शिकार बनाता है। 

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