Sunday, Sep 26, 2021
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नाबालिग लड़की का हाथ पकड़ना, पैंट की ज़िप खोलना, POCSO के तहत यौन हमला नहीं- बॉम्बे हाईकोर्ट

  • Updated on 1/28/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। स्किन टू स्किन (Skin to Skin Contact) फैसले के बाद बच्चों से यौन अपराध पर बॉम्बे हाईकोर्ट का एक और फैसला आया है। कोर्ट ने कहा है कि नाबालिग लड़की का हाथ पकड़ना और पैंट की ज़िप खोलना, पॉक्सो (POCSO) के तहत यौन हमला नहीं  है, बल्कि यह आईपीसी (IPC) की धारा 354 के तहत यौन उत्पीड़न के तहत अपराध है। 

इस मामले की सुनवाई जस्टिस पुष्पा गनेदीवाला की एकल पीठ ने की, जिसमें 50 वर्षीय एक व्यक्ति द्वारा 5 साल की लड़की से यौन कृत्य मामले में ये फैसला सुनाया गया। 

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हाईकोर्ट में आने से पहले यह केस निचली अदालत में पोक्सो की धारा 10 के तहत यौन हमले के तहत चलाया गया था जिसमें आरोपी को 5 साल के सश्रम कारावास और 25,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस मामले में पीड़ित लड़की की मां ने शिकायत दी थी कि आरोपी की पैंट की ज़िप खुली हुई थी और उसकी बेटी के हाथ उस आरोपी के हाथ में था।

कोर्ट ने यहां फैसला सुनाते हुए यौन हमले की परिभाषा में " शारीरिक संपर्क" शब्द की व्याख्या भी की। कोर्ट ने बताया कि इसका अर्थ है "प्रत्यक्ष शारीरिक संपर्क-यानी यौन प्रवेश के बिना स्किन- टू -स्किन- कॉन्टेक्ट।"

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 सुनवाई में अदालत ने कहा कि ये मामला IPC की धारा 354A (1) (i) के तहत आता है इसलिए, पॉक्सो अधिनियम की धारा 8, 10 और 12 के तहत सजा को रद्द किया जाता है और आरोपी को आईपीसी की धारा 354A (1) (i)  के तहत दोषी पाया जाता है, जिसमें अधिकतम 3 साल की कैद का प्रावधान है। फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि अभियुक्त द्वारा पहले से ही 5 महीने की कैद की सजा काटी जा चुकी है जो अपराध के लिए पर्याप्त सजा है। 

बता दें, इससे पहले 19 जनवरी को इसी बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ' स्किन- टू -स्किन- कॉन्टेक्ट ‘ के बिना पीड़िता के ब्रेस्ट को टटोलना यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम पॉक्सो के तहत 'यौन हमले' का गंभीर अपराध नहीं है लेकिन भारतीय दंड संहिता के तहत छेड़छाड़ होगा। 

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लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा स्किन टू स्किन (Skin to Skin Contact) फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से इस बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने सीजीआई (CJI) से कहा कि हाईकोर्ट से विस्तृत जानकारी तलब की जाएगी। बताया जा रहा है कि अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट में इस मामले को उठाया।

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