Sunday, Dec 04, 2022
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Mirza Najaf Khan was the Commander-in-Chief of Najafgarh

नजफगढ़ के कमांडर इन चीफ थे मिर्जा नजफखां

  • Updated on 7/17/2022

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। दिल्ली देहात का इतिहास अपने आपमें कई कहानियों को समेटे हुए है। इन्हीं में से एक है नजफगढ़। नजफगढ़ का नाम बादशाह शाह आलम द्वितीय के कमांडर इन चीफ मिर्जा नजफखां के नाम पर रखा गया। जिसने मुगलों के शहर शाहजहांनाबाद से करीब 30-32 किलोमीटर दूर साल 1733-1782 में एक सैन्य चौकी स्थापित की और बाद में एक मजबूत किला बनाया। दरअसल नजफखां ने रोहिल्लों और सिखों के हमलों से बचाने के लिए इस मजबूत किले को बनाया था। लेकिन नजफखां की मौत के बाद कोई भी मुगल सेना में मजबूत कमांडर नहीं बचा, जिसकी वजह से रोहिल्ला अफगान सरगना जबिता खान ने इसे अपना गढ़ बना लिया।
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नजफगढ़ का दिल्ली गेट बयां करता है नजफखां की कहानी
बता दें कि नजफगढ़ के मित्राऊं गांव में दिल्ली की पहली कचहरी थी, जहां से दिल्ली सहित भरतपुर रियासत के मामलों का निपटान किया जाता था। यही नहीं 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों ने नजफगढ़ के किले की घेराबंदी कर दी थी। 25 अगस्त 1857 को ब्रिटिश सैनिकों व क्रांतिकारियों के बीच यहीं संघर्ष हुआ था। इस संघर्ष के दौरान 800 लोग मारे गए थे। नजफगढ़ में मुगल सैनिकों व ब्रिटिश सेना के बीच संघर्ष हुआ था, हार के बाद दिल्ली ब्रिटिश साम्राज्य के नियंत्रण में चली गई। साल 1858 में नजफगढ़ को पंजाब प्रांत के दिल्ली डिविजन के तहत दिल्ली जिले का हिस्सा बना दिया गया था। अब नजफखां के मजबूत किले के अवशेष तो नहीं दिखते लेकिन आज भी नजफगढ़ का दिल्ली गेट नजफखां की कहानी बयां करता है। जहां बाद में अंग्रेजों ने कई क्रांतिकारियों को फांसी दे दी थी।
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क्रिकेट में नजफगढ़ के नवाब से मशहूर हैं वीरेंद्र सहवाग
दिल्ली में खिलाडिय़ों की भूमि नजफगढ़ कहलाती है, जिसने कई विश्वविख्यात खिलाडिय़ों के साथ ही सैंकड़ों राष्ट्रीय स्तर व राज्य स्तर के खिलाडिय़ों को पैदा किया है। पूरे विश्व में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाने वाले क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग को नजफगढ़ के नवाब के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा सुशील कुमार (कुश्ती), रणवीर सहरावत कबड्डी में इंडिया टीम के कैप्टन रह चुके हैं और वर्तमान में बैंग्लुरू गोल्स प्रो कबड्डी के ट्रेनर हैं। यही नहीं नजफगढ़ के डिप्टी कमांडेंट ईश्वर पूनिया हिंद केसरी के नाम से जाने जाते हैं। 

सूबेदार हठ्ठी सिंह ने बनवाया था गांव में कृषि वैज्ञानिक केंद्र व स्कूल
जब देश आजाद हुआ तब नजफगढ़ के हालात काफी दयनीय थे। पहला पब्लिक इलेक्शन साल 1952 में तब सूबेदार हठ्ठी सिंह विधायक बने। उन्होंने डाबर एजुकेशन ट्रस्ट चंदा इकट्ठा करके शुरू किया और साल 1945 में उज्वा में सेंटर प्लेस बनाकर पूर्व सैन्य अधिकारियों के साथ मिलकर पहला स्कूल बनवाया। जो 36 गांव को शिक्षा देने का काम करता था।
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रोशनपुरा गांव में बने कॉलेज : डॉ. सत्यपाल भारद्वाज
नजफगढ़ के रोशनपुरा गांव में 100 बीघा जमीन दिल्ली विश्वविद्यालय को दी गई थी लेकिन आज तक इस जमीन की बाउंड्री नहीं हुई है। अगर यहां कॉलेज बनता तो उच्चशिक्षा के लिए नजफगढ़ देहात के बच्चों को 40 किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ता। हमारी यही मांग है कि यहां जल्दी कॉलेज बने।

नाहरगढ़ हो नजफगढ़ का नाम : अनिल डागर
हम लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि नजफगढ़ का नाम बदलकर नाहरगढ़ किया जाए। नजफखां मात्र ढाई साल यहां रहा, उसके बाद राजा नाहर सिंह की रिसायत रही 210 गांव आते थे। उनकी रिसायत 1857 के बाद खत्म हुई और उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लिया था। हमने 10 हजार लोगों से अभी तक हस्ताक्षर भी करवाए हैं।
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राजनीति के चलते रूकी नजफगढ़ की तरक्की : प्रवीन डागर
नजफगढ़ का इतिहास रहा है कि यहां निर्दलीय उम्मीदवार अधिकतर जीते। जिसकी वजह से केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा वो मदद नहीं मिली जो मिलनी चाहिए थी। राजनीति का शिकार होने की वजह से तरक्की रूकी रही। शिक्षा की ओर सरकार को यहां ओर अधिक काम करने की जरूरत है।

बारिश में जलजमाव बड़ी समस्या : आजाद सिंह राठी
नजफगढ़ में समस्याओं का बड़ा अंबार है लेकिन यहां कि सबसे बड़ी समस्या बारिश के मौसम में जलजमाव का होना है। कमर तक कई इलाकों में पानी एकत्र हो जाता है, जिससे आप अपने घरों से बाहर नहीं निकल सकते हैं। लोग बारिश के मौसम में गाड़ी लेकर घर से बाहर निकलने में कतराते हैं।

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