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मिस्त्री-टाटा विवाद: रतन टाटा भी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, कहा- मिस्त्री ने नाम खराब किया

  • Updated on 1/4/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सायरस मिस्त्री मामले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के फैसले के खिलाफ टाटा ग्रुप (Tata Group) के चेयरमैन एमेरिटस रतन टाटा (Emeritus Ratan Tata) ने भी आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपील दायर कर दी। रतन टाटा (Ratan Tata) ने दलील दी है कि अपीलेट ट्रिब्यूनल ने उन्हें बिना तथ्यों या कानूनी आधार के दोषी ठहरा दिया। मिस्त्री की कमियों की वजह से टाटा ग्रुप का नाम खराब हुआ है। टाटा की याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई के आसार हैं। 

बता दें कि मिस्त्री को अक्टूबर 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाने के मामले में ट्रिब्यूनल ने बीते 18 दिसंबर को फैसला दिया था। फैसले में कहा था कि रतन टाटा ने टाटा संस के अल्प शेयरधारकों के हितों की अनदेखी कर पक्षपातपूर्ण और दमनकारी कदम उठाए। मिस्त्री फिर से टाटा संस के चेयरमैन नियुक्त किए जाएं। बता दें कि मिस्त्री परिवार के पास टाटा संस के 18.4 प्रतिशत शेयर हैं।

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रतन टाटा की 5 अहम दलीलें
- मिस्त्री प्रोफेशनल क्षमताओं के आधार पर टाटा संस के चेयरमैन बनाए गए थे, शपूरजी पालोनजी ग्रुप के प्रतिनिधि के नाते नहीं।
- मिस्त्री की नियुक्ति के वक्त यह शर्त रखी गई कि वे परिवार के बिजनेस से खुद को अलग रखेंगे, इस मामले में अनिच्छा की वजह से मिस्त्री की लीडरशिप प्रभावित हो रही थी।
- मिस्त्री ने शक्तियां और अधिकार अपने हाथ में लेने पर फोकस किया, बोर्ड के सदस्य अलग-थलग किए जा रहे थे।
- मिस्त्री जापान की कंपनी डोकोमो के साथ टाटा की पार्टनरशिप को संभालने में विफल रहे। इस मामले में उनका जिद्दी रवैया सामने आया था। यह टाटा संस ब्रांड की पहचान के विपरीत था। 
- ट्रब्यूनल के फैसले में कहा गया कि मेरे और मिस्त्री के बीच 550 ई-मेल का आदान-प्रदान हुआ लेकिन ये मेल चेयरमैन एमेरिटस (जो सम्मानपूर्वक सेवामुक्त हुआ हो) और चेयरमैन के बीच विचारों के आदान-प्रदान के लिए हुए थे। इनमें दखल देने जैसी कोई बात नहीं थी।

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रतन टाटा ने ट्रिब्यूनल का फैसला खारिज करने की अपील की
रतन टाटा ने कहा है कि ट्रिब्यूनल का निष्कर्ष गलत है, यह केस के रिकॉर्ड के विपरीत है। फैसले में एक चुनिंदा बात का प्रचार किया गया, जबकि संबंधित तथ्य और रिकॉर्ड दबा दिए गए। रतन टाटा ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि ट्रिब्यूनल का फैसला खारिज किया जाए। टाटा संस भी वीरवार को ट्रिब्यूनल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुका है।

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NCLAT ने कम्पनी पंजीयक की याचिका पर फैसला रखा सुरक्षित
NCLAT ने टाटा संस और साइरस मिस्त्री मामले में कंपनी पंजीयक की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है। कंपनी पंजीयक ने एनसीएलएटी के 18 दिसंबर के आदेश में संशोधन का आग्रह किया था। सोमवार को एनसीएलएटी  फैसला सुनाएगा। पहले एन.सी.एल.टी. का फैसला टाटा संस के पक्ष में आया था, जिसके बाद साइरस फैसले के खिलाफ  एनसीएलएटी में चले गए थे। इसके बाद 18 दिसम्बर को एनसीएलएटी ने साइरस मिस्त्री के पक्ष में फैसला देते हुए उन्हें फिर से अध्यक्ष बनाने का आदेश दिया था। बता दें कि  एनसीएलएटी ने टाटा-मिस्त्री मामले में कंपनी पंजीयक की याचिका पर सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया था। एनसीएलएटी. के चेयरमैन न्यायमूर्ति एस.जे. मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली 2 सदस्यीय पीठ ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को कंपनी अधिनियम के नियमों के तहत निजी और सार्वजनिक कंपनियों की परिभाषा का विवरण जमा करने के लिए कहा है।

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NCLAT की 2 सदस्यीय पीठ ने लिया था फैसला 
न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की अगुवाई वाली एनसीएलएटी की 2 सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि मिस्त्री के खिलाफ  रतन टाटा के उठाए गए कदम परेशान करने वाले थे। पीठ ने नए चेयरमैन की नियुक्ति को भी अवैध ठहराया। अदालत ने यह भी कहा कि टाटा संस को पब्लिक कम्पनी से निजी बनाने का फैसला भी गैर-कानूनी है और इसे पलटने का आदेश दिया जाता है। यह आदेश 4 सप्ताह में लागू होगा और टाटा समूह के पास इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का भी विकल्प है। इसके बाद साइरस मिस्त्री पर एनसीएलएटी के आदेश के खिलाफ टाटा संस ने उच्च न्यायालय में अपील की।

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