Tuesday, Dec 07, 2021
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Mobilization started in Congress for the post of Leader of Opposition in Rajya Sabha rkdsnt

राज्यसभा में नेता विपक्ष पद के लिए कांग्रेस में शुरू हुई लामबंदी, 4 सदस्यों का खत्म हो रहा कार्यकाल

  • Updated on 2/7/2021

नई दिल्ली, 7 फरवरी (नवोदय टाइम्)। संसद के उच्च सदन, राज्यसभा से इस महीने कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद समेत चार सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इन चार में से तीन जम्मू-कश्मीर से हैं, जिनके रिटायर होने के बाद राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा। आजाद नेता विपक्ष की भूमिका में हैं, लिहाजा उनकी जगह नए नेता विपक्ष के लिए कांग्रेस के भीतर लामबंदी तेज हो गई है।

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राज्यसभा में कांग्रेस के अभी 37 सदस्य हैं, जिसमें से एक गुलाम नबी आजाद भी हैं। आजाद का कार्यकाल 15 फरवरी को समाप्त हो रहा है। इनके साथ ही जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के दोनों सांसद मीर मोहम्मद फैयाज और नजीर अहमद का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है। नजीर का 10 फरवरी को और मीर मोहम्मद का 15 फरवरी को कार्यकाल खत्म होगा। वहीं भाजपा के शमशेर सिंह मन्हास का कार्यकाल भी 10 फरवरी को समाप्त हो रहा है।

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आजाद, नजीर और मीर उच्च सदन में जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में जब तक विधानसभा चुनाव नहीं होते, तब तक के लिए राज्यसभा में इस राज्य का प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के बाद से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया है और अभी यहां विधानसभा बहाल करने की प्रक्रिया नहीं की गई है।

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राज्यसभा में कांग्रेस दूसरे नंबर के सबसे बड़ी पार्टी है, लिहाजा नेता विपक्ष का पद उसे ही मिला हुआ है। गुलाम नबी आजाद अभी नेता विपक्ष की भूमिका में हैं। 15 फरवरी को उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद यह जिम्मा किसे मिलेगा, इसे लेकर कांग्रेस के भीतर कयासों का बाजार गर्म है। चर्चा है कि लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता रह चुके मल्लिकार्जुन खड़गे राज्यसभा में आजाद की जगह ले सकते हैं। उन्हें राहुल गांधी का विश्वासपात्र माना जाता है। लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी राहुल की पहल पर खड़गे को राज्यसभा में लाया गया।

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हालांकि इस पद की दौड़ में पी. चिदम्बरम और आनंद शर्मा का भी नाम है। आनंद शर्मा अभी राज्यसभा में उपनेता भी हैं। लेकिन संगठन के अंदरूनी चुनाव के लिए हाईकमान को चिट्ठी लिखने वाले 23 नेताओं में वे भी शामिल हैं। पार्टी के भीतर एक नाम और उछाला जा रहा है, वह है दिग्विजय सिंह का। हालांकि दिग्विजय की पिछले काफी समय से गांधी परिवार से एक दूरी बनी हुई है। लेकिन दस साल मध्य प्रदेश जैसे राज्य का मुख्यमंत्री रहने, लोकसभा और राज्यसभा का लंबा सियासी अनुभव, मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया देने की कला और हिंदी-अंग्रेजी पर बराबर की पकड़ उनके पक्ष में है।

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