Sunday, Oct 17, 2021
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modi bjp govt instructions given to military officers to keep close watch on china activities rkdsnt

सैन्य अधिकारियों को दिए गए चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश

  • Updated on 6/21/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। चीन के साथ लगती 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात सशस्त्र बलों को चीन के किसी भी आक्रामक बर्ताव का ‘‘मुंह तोड़’’ जवाब देने की ‘‘पूरी आजादी’’ दी गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ लद्दाख में हालात पर उच्च स्तरीय बैठक के बाद सूत्रों ने यह जानकारी दी। रक्षा मंत्री के साथ इस बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने हिस्सा लिया। 

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पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून को चीन के साथ हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिकों के शहीद होने के बाद भारत ने चीन से लगती सीमा पर अग्रिम इलाकों में लड़ाकू विमान और हजारों की संख्या में अतिरिक्त सैनिकों को भेजा है। गलवान घाटी में हिंसा 45 वर्षों में सीमा पार हिंसा की सबसे बड़ी घटना है और इससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। हालात के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन को कड़ा संदेश दिया है कि, ‘‘भारत शांति चाहता है, लेकिन अगर उकसाया गया तो मुंह तोड़ तवाब देने में सक्षम है।’’ 

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सूत्रों ने बताया कि रविवार को हुई बैठक में सिंह ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों को जमीनी सीमा, हवाई क्षेत्र और रणनीतिक समुद्री मार्गों में चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। सैन्य सूत्रों ने बताया कि गलवान की घटना के बाद भारतीय सैनिक टकराव की हालत में अग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल नहीं करने की लंबी समय से चली आ रही प्रथा को मानने के लिए बाध्य नहीं होंगे। सूत्रों ने बताया कि सशस्त्र बलों को चीनी सैनिकों के किसी भी दुस्साहस का मुंह तोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने को कहा गया है और सीमा की रक्षा के लिए ‘‘सख्त’’ कदम उठाए जा रहे है। 

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गलवान घाटी में चीन के साथ हिंसक झड़प में भारत के कम से कम 76 सैनिक घायल हो गए थे वहीं चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अपने सैनिकों के हताहत होनें के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी हैं। सूत्रों ने बताया कि सशस्त्र बलों को दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की सेना के किसी भी प्रकार के आक्रामक रवैए से निपटने के लिए पूरी स्वतंत्रता दी गई है। दोनों सेनाएं सीमा प्रबंधन पर हुए दो समझौतों के प्रावधानों के अनुरूप टकराव के दौरान आग्नेयास्त्रों का फिर से इस्तेमाल नहीं करने पर आपसी रूप से सहमत हुईं। इन समझौतों पर 1996 और 2005 में हस्ताक्षर हुए थे। 

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