Wednesday, Apr 08, 2020
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जस्टिस मुरलीधर के तबादले पर कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने दी सफाई

  • Updated on 2/27/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली हाई कोर्ट के जज एस. मुरलीधर के तबादले को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने जहां जज के तबादले पर जहां मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है, वहीं मोदी सरकार ने भी अपना रूख साफ कर दिया है। अपनी सफाई में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि कोलेजियम ने 12 फरवरी को जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर की सिफारिश कर दी थी। ऐसे में यहां कानूनी प्रक्रिया का ही पालन किया गया है। 

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प्रसाद ने अपने ट्वीट में लिखा, 'जस्टिस मुरलीधर का तबादला भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट वाले कॉलेजियम की 12 फरवरी की सिफारिश के मुताबिक किया गया था। जज का ट्रांसफर करते वक्त जज की अनुमति ली जाती है और यहां सही तरह से निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है।'

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कानून मंत्री ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, 'हम न्यायपालिका की आजादी का सम्मान करते हैं। न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता करने में कांग्रेस का रिकॉर्ड है। इमरजेंसी के समय जजों को नजरअंदाज किया गया। वे तभी खुश होते हैं, जब फैसला उनकी पसंद का होता है, नहीं तोसंस्थानों पर ही सवाल उठाते हैं।'

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जस्टिस लोया मामले पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के ट्वीट पर प्रसाद ने कहा, 'जस्टिस लोया मामले के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने अच्छी तरह से सुलटा लिया है। सवाल उठाने वाले लोग व्यापक तर्कों के बाद कोर्ट के फैसले का आदर नहीं करते हैं। क्या राहुल गांधी खुद को सुप्रीम कोर्ट से भी ऊपर मानते हैं?'

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