Monday, Nov 29, 2021
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राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, सभी को अपना बनाना प्रणब मुखर्जी की प्रकृति में था: मोहन भागवत

  • Updated on 9/1/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) को याद कर कहा कि उन्होंने एक खालीपन छोड़ दिया है। वह उदार और दयालु थे, उनसे बात करते हुए उनका ऐसा व्यवहार था कि मैं भूल जाता था कि मैं भारत के राष्ट्रपति से बात कर रहा हूं। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, सभी को अपना बनाना उनकी प्रकृति में था। उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

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संघ के लिये बताया मार्गदर्शक
बता दें कि इससे पहले सोमवार को प्रणब मुखर्जी को संघ के लिये एक मार्गदर्शक करार दिया और कहा कि वह राजनीतिक छुआछूत में विश्वास नहीं करते थे। भागवत ने संघ के महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी के साथ एक संयुक्त बयान में कहा कि मुखर्जी एक कुशल प्रशासक थे जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते थे।

बयान में उन्होंने कहा कि मुखर्जी राजनीतिक अस्पृश्यता नहीं मानते थे और सभी दल उनका सम्मान करते थे। इसमें कहा गया, 'वह संघ के लिये एक मार्गदर्शक थे और संगठन के प्रति उनका स्नेह था तथा उनके निधन से आरएसएस की अपूर्णीय क्षति हुई है।' सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक संरक्षक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में जून 2018 में शामिल होने पर मुखर्जी अपनी ही पार्टी में निशाने पर आ गए थे।

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कांग्रेस ने भी प्रणब मुखर्जी की थी सराहना
मुखर्जी द्वारा अपने भाषण में बहुलतावाद, सहिष्णुता और समावेश को भारत की आत्मा बताने के बाद कांग्रेस ने भी उनकी सराहना की थी। अपने संबोधन में मुखर्जी ने चेतावनी दी थी कि धर्म, घृणा, हठधर्मिता और असहिष्णुता के जरिये भारत को परिभाषित करने के किसी भी प्रयास से हमारा अस्तित्व कमजोर होगा और सार्वजनिक चर्चाओं को हिंसा के सभी रूपों से मुक्त रखना चाहिए। 

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