Sunday, Feb 05, 2023
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Morbi Bridge Accident: प्रत्यक्षदर्शी ने कहा- कुछ युवक जानबूझकर हिला रहे थे पुल

  • Updated on 10/31/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। गुजरात के मोरबी में केबल ब्रिज हादसे में साजिश का एंगल में सामने आ रहा है।घटना के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पुल पर बड़ी संख्या में लोग थे लेकिन उनमें से कुछ युवक जानबूझकर झूला पुल को हिला रहे थे। सोशल मीडिया पर वायरल काई वीडियो में कुछ युवकों को बीच पुल पर कूदते देखा जा सकता है। ऐसे में यह सवाल भी उठने लगा है कि झूला पुल हादसा महज दुर्घटना है या जानबूझ कर किया गया षड्यंत्र।

अहमदाबाद के रहने वाले विजय गोस्वामी और उनके परिवार के लोग मोरबी में हुए पुल हादसे में बाल-बाल बच गए। गोस्वामी पूरे परिवार के साथ रविवार को हुए भीषण हादसे से कुछ घंटे पहले ही पुल पर गए थे, लेकिन युवकों की ओर से केबल पुल हिलाए जाने के कारण वह नीचे उतर आए।  

गोस्वामी ने कहा कि जब वह और उनका परिवार पुल पर था तो कुछ युवक जानबूझ कर पुल को हिला रहे थे, उस कारण पुल पर लोगों का चलना भी दूभर हो रहा था। गोस्वामी को लगा कि इससे खतरा हो सकता है। वह और उनका परिवार पुल से नीचे उतर आए। उन्होंने बताया कि इसके बारे में उन्होंने पुल के कर्मचारियों को भी सूचना दी, लेकिन उन्होंने उसे नजरअंदाज कर दिया। ब्रिटिश काल में बना यह पुल मरम्मत के बाद चार दिन पहले ही लोगों के लिए खुला था।

गोस्वामी ने कहा कि वह दीवाली की छुट्टियों में परिवार के साथ मोरबी आए थे। अहमदाबाद पहुंचने के बाद गोस्वामी ने बताया, 'पुल पर बहुत भीड़ थी। जब मैं और मेरा परिवार वहां पहुंचे तो कुछ युवक जानबूझकर पुल को हिला रहे थे। लोगों के लिए बिना सहारे के उसपर खड़ा होना मुश्किल था। चूंकि मुझे लगा कि यह खतरनाक साबित हो सकता है, मैं पुल पर कुछ दूर चढ़ने के बाद ही परिवार के साथ नीचे उतर आया।'

3.5 लाख में बना और 140 साल चला 
अंग्रेजों के समय बना यह हैंगिंग ब्रिज करीब 140 साल पुराना बताया जाता है। इसका उद्घाटन 20 फरवरी 1879 को मुम्बई के गवर्नर रिचर्ड टेम्पल ने किया था। इसके निर्माण पर 3.5 लाख रुपए लागत आई थी और पूरा सामान इंग्लैंड से आया था।

दो करोड़ में मरम्मत और चार दिन में टूटा

26 अक्तूबर को गुजराती नववर्ष पर इस पुल को जनता के लिए फिर से खोला गया था। इससे पहले लगभग छह महीने तक पुल की मरम्मत का काम किया था। इस पुल के मेंटिनेंस की जिम्मेदारी ओरेवा ग्रुप के पास है। यह ग्रुप ही टोल वसूलता है। इसकी मरम्मत के नाम पर भी दो करोड़ रुपए खर्च किए गए। 30 अक्तूबर को खुलने के चार दिन के भीतर ही यह पुल टूट गया। सरकार ने अब हादसे की जांच के लिए पांच सदस्यीय एसआईटी बना दी है।

  

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