Sunday, Jan 19, 2020
More than 300 people being killed every day in Punjab by stary animals

देश में बढ़ रहा आवारा कुत्तों का उत्पात पंजाब में ही प्रतिदिन 300 लोग हो रहे शिकार

  • Updated on 7/24/2019

देश के अधिकांश राज्यों में आवारा जानवरों (Stary Animals) के उत्पात ने कोहराम मचा रखा है जिनमें कुत्ते (Dog), बंदर (Monkey) और अनाथ गौवंश मुख्य हैं। देश में सबसे अधिक केस कुत्तों के काटने के आ रहे हैं जिसके चंद ताजा उदाहरण निम्र हैं :

  • 07 जुलाई को पंचकूला में अनन्या नामक एक 4 वर्षीय मासूम बच्ची पर हमला करके कुत्ते ने उसके चेहरे पर इतनी बुरी तरह से काट लिया कि  बच्ची के चेहरे की माइक्रोफेशियल सर्जरी (Microfashial surgery) करनी पड़ेगी। 
  • 12 जुलाई को बरेटा में घर के बाहर खेल रहे 2 वर्षीय बालक को आवारा कुत्तों ने काट कर बुरी तरह घायल कर दिया।
  • 18 जुलाई को राजस्थान (Rajasthan) में जनूथर के नगला गांव में आवारा कुत्तों (Stray dogs) ने आधा दर्जन लोगों को काट लिया। 
  • 19 जुलाई को जालंधर के निकट भोगपुर में खूंखार आवारा कुत्तों ने एक प्रवासी मजदूर को घेर कर नोच-नोच कर मार डाला। 
  • 20 जुलाई को नूरपुर बेदी ब्लाक के गांव खड्डा राजगिरी के एक युवक की लावारिस कुत्ते के काटने से मौत हो गई। 
  • 20 जुलाई को रायबरेली के कैंथवल गांव में कुत्ते के काटने से एक युवक की मौत हो गई। 
  • 20 जुलाई को मुम्बई के कस्तूरबा मैमोरियल अस्पताल (Kasturba Memorial Hospital) में इलाज के लिए भर्ती कुत्तों के काटे 3 बच्चों (Children) में से एक की मृत्यु हो गई।
  • 22 जुलाई को राजस्थान में जनूथर के गांव मवई में 35 वर्षीय युवक को आवारा कुत्तों ने काट लिया जब वह अपने घर जा रहा था। 

निश्चय ही यह अत्यंत ङ्क्षचताजनक स्थिति है जो इतनी गंभीर हो चुकी है कि पिछले 2 वर्षों के दौरान अकेले पंजाब में ही प्रतिदिन कुत्तों के काटने के 300 से अधिक मामले सामने 
आ रहे हैं। 

राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष अभी तक कुत्तों के काटने के 50,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं तथा देश के अन्य अनेक राज्यों में भी लगभग 
ऐसी ही स्थिति है। 

त्रासदी यह भी है कि अस्पतालों में कुत्ते के काटे ग्रेड-3 रोगियों के उपचार के लिए एंटी रैबिज सीरम (ए.आर.एस.) भी उपलब्ध नहीं है जो पीड़ितों को बाजार से महंगे भाव पर खरीदना पड़ता है और वह भी आसानी से उपलब्ध नहीं है।

लिहाजा जब तक केंद्र और राज्य सरकारें आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके काटने से होने वाली अकाल मौतों पर रोक लगाने और इलाज के लिए जरूरी दवाएं सरकारी अस्पतालों में सुगमतापूर्वक उपलब्ध करवाने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं करेंगी तब तक इस समस्या से मुक्ति मिल पाना मुश्किल है और ऐसे में आवारा कुत्तों के काटने से होने वाली मौतें लगातार बढ़ती ही जाएंगी।                                                                                                 —विजय कुमार 
 

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