Thursday, Nov 14, 2019
Mosquitoes startling humans, expert surprised by behavior

इंसान को चौंका रहे मच्छर, व्यवहार से विशेषज्ञ भी हैरान

  • Updated on 8/14/2019

नई दिल्ली (अंकुर शुक्ला): डेंगू-मलेरिया की आशंका से सतर्क दिल्लीवासियों को मच्छरों ने बड़ी चतुराई से झटका दिया है। राजधानी के लोगों के सामने आने वाले समय में असमंजस की स्थिति पैदा होने वाली है क्योंकि मच्छरों ने जिंदा रहने के लिए अपने व्यवहार में आश्चर्यजनक तरीके से परिवर्तन कर लिया है। मच्छरों के बदलते हुए पैतरें से सामुदायिक मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ भी हैरान हैं। विशेषज्ञों ने इस स्थिति को चिंताजनक करार दिया है। साथ ही मच्छरों के व्यवहार से संबंधित परिवर्तन पर गहन अध्ययन करने की जरूरत जताई है। यहां बता दें कि डेंगू मच्छरों (एडीज) के व्यवहार में परिवर्तन पहले ही विशेषज्ञों के लिए चुनौती बना हुआ है।

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साफ पानी में भी पनप रहा है मलेरिया का मच्छर
 
ज्यादातर लोग इस तथ्य से वाकिफ हैं कि मलेरिया का मच्छर (एनोफि लीज) गंदे पानी में पनपता है, लेकिन विशेषज्ञों ने पाया है कि एनोफिलीज ने अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए अपने व्यवहार में जरूरत के मुताबिक परिवर्तन कर लिया है। विशेषज्ञों ने पाया है कि महानगरों में एनोफिलीज साफ पानी में भी पैदा हो 
रहे हैं। 
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रात के अंधेरे में डेंगू और दिन के उजाले में मलेरिया से रहना होगा सतर्क
सफदरजंग सामुदायिक मेडिसिन विभाग के निदेशक और एचओडी प्रोफेसर जुगल किशोर (jugal kishore) के मुताबिक शहरी रहन-सहन में परिवर्तन मच्छरों के व्यवहार में परिवर्तन की बड़ी वजह साबित हो रही है। महानगरों और शहरों में देर रात तक पर्याप्त रोशनी होनेे के कारण मलेरिया के मच्छरों के सामने अस्तित्व को बनाए रखना मुश्किल हो गया था। उनका जीवन चक्र इससे प्रभावित होने लगा था। मच्छर भोजन के लिए संघर्ष की स्थिति में थे। नतीजतन, उन्होंने चुनौतिपूर्ण स्थिति में खुद को जिंदा रखने की कला सीख ली है।  डॉ.जुगल किशोर के मुताबिक डेंगू मच्छरों ने भी इसी वजह से अपने व्यवहार में परिवर्तन किया है। उन्होंने बताया कि अफ्रिका में किए गए एन्टोमोलॉजिकल रिसर्च में मच्छरों के व्यवहार परिवर्तन की पुष्टि हुई है।

 
मलेरिया मरीजों की तादाद बढना खतरे की घंटी  
प्रोफेसर जुगल किशोर के मुताबिक राजधानी दिल्ली में झुग्गी में रहने वाली आबादी में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यहां रहने वाले लोग विशेषतौर से मलेरिया के मच्छरों के आसान शिकार हैं। खासतौर से यमुना खादर क्षेत्रों में रहने वाली आबादी मलेरिया के मच्छरों के निशाने पर है क्योंकि वहां पानी का ठहराव है। गंदे पानी की उपलब्धता है और एनोपिलीज को विकसित होने के लिए मुफीद माहौल भी मौजूद है। विशेषज्ञों के मुताबिक मच्छर जनित बीमारियों में जुटी सरकारी निकायों का पूरा ध्यान डेंगू और चिकनगुनिया पर ही केंद्रित है, जिसकी वजह से भी मलेरिया को पनपने के मौके मिल रहे हैं। पिछले 5-6 वर्षों के दौरान मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए फॉगग के अलावा कुछ खास नहीं किया जा सका है और मलेरिया नियंत्रण क्रियाकलाप जरूरत के मुताबिक नहीं हो पा रही है। 

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कमजोर हो रही है दिल्लीवासियों की रोगप्रतिरोधक क्षमता 
प्रोफेसर के मुताबिक आमतौर पर मलेरिया संक्रमण से एक व्यस्क व्यक्ति एक बार पीड़ित हो गया तो आगे उसे मलेरिया होने का जोखिम बेहद ही कम रह जाती है। अक्सर बच्चे मलेरिया से प्रभावित होते हैं, लेकिन राजधानी में लोगों की अनियमित जीवनशैली लोगों की रोगप्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर रही है। मलेरिया मरीजों की तादाद ज्यादा होने के पीछे खराब रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बड़ी वजह हो सकती है।

इसके अलावा ऐसा पाया गया है कि मलेरिया से पीड़ित मरीजों को विशेषज्ञ अब भी क्लोरोक्विन नाम की दवा लिख रहे हैं। जबकि, वक्त के साथ मलेरिया के पैरासाइट ने इस दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है।

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