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वो योजना जिसके तहत हुआ भारत-पाक विभाजन, ऐसे बनी सरहदें...

  • Updated on 8/14/2019

नई दिल्ली/ कामिनी बिष्ट। करीब 300 साल तक अंग्रेजों की गुलामी के बाद भारत को आजादी मिलने वाली थी। सैकड़ों रियासतों में बंटा भारतीय उपमहाद्वीप... न जाने कितनी जाने गईं, कितनी क्रांतियों के बाद भारत को आजादी का दिन देखना तो नसीब हुआ लेकिन अपना एक अंग गंवाने की शर्त पर। भारत के दो टुकड़ों पर मुहर लगाने वाली माउंटबेटन योजना हर साल 14 अगस्त को याद आती है। इस दिन भारत-माता के शरीर से उसका एक अंग काट लिया गया और धार्मिक आधार पर बना एक अलग मुल्क पाकिस्तान।

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3 जून 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने अपनी योजना प्रस्तुत की जिसमें भारत की राजनीतिक सम्सया को हल करने के नाम पर अंतिम निष्कर्ष उसका विभाजन निकाला गया। इस योजना में जो प्रावधान थे वो निम्म प्रकार से हैं-

  • भारत को दो हिस्सों में विभाजित किया जाएगा जिससे दो अलग-अलग देश भारत और पाकिस्तान बनेंगे।
  • पाकिस्तान का संविधान बनाने के लिए एक अगल संविधान सभा का गठन किया जायेगा।
  • रियासतों को ये छूट दी गई कि वो चाहें तो पाकिस्तान में मिल जाएं या भारत में। दोनो देशों में न मिलने वाली रियासतें स्वतंत्र रूप से रह सकती थी।
  • बंगाल और पंजाब के विभाजन का प्रवधान भी इसी योजना में किया गया। साथ ही उत्तर पूर्वी सीमा प्रान्त और असम के सिलहट जिले के लोगों की इच्छा जानने के लिए जनमत संग्रह कराने का प्रावधान भी किया गया।
  • भारत और पाकिस्तान को सत्ता में काबिज होने के लिए 15 अगस्त 1947 का दिन दिया गया।
  • ब्रिटिश सरकार ने सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो आयोगों का गठन किया। इन आयोगों का काम विभाजन की देख-रेख और भारत-पाक की अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं को निर्धारित करना था।
  • भारतीय में राजनीतिक और धार्मिक कलह का आलम ये था कि भारत माता के टुकड़े करने की शर्त को स्वतंत्रता की लड़ाई मिलकर लड़ने वाले नेताओं ने माउंटबेटन योजना को स्वीकार कर लिया।
  • ब्रिटिश सरकार का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 जुलाई 1947 में पारित किया गया। इस अधिनियम में वो प्रमुख प्रावधान थे जिन्हें माउंटबेटन योजना ने आगे बढ़ाया था।

भारत और पाकिस्तान के विभाजन के उद्देश्य से लाई गई योजना के आगे घुटने टेक दिए गए। मिलकर स्वतंत्र भारत का सपना देखने वाले भगत सिंह और अश्फाकउल्ला खान की कुर्बानी के टुकड़े कर दिए गए। हिंदू-मुस्लिम दोनो के एकजुट प्रयासों से बने भारतीय उपमहद्वीप को भारत और पाकिस्तना में बांट दिया गया।

 

 

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