Tuesday, Sep 22, 2020

Live Updates: Unlock 4- Day 22

Last Updated: Tue Sep 22 2020 10:01 PM

corona virus

Total Cases

5,617,699

Recovered

4,551,086

Deaths

89,579

  • INDIA7,843,243
  • MAHARASTRA1,224,380
  • ANDHRA PRADESH631,749
  • TAMIL NADU547,337
  • KARNATAKA526,876
  • UTTAR PRADESH364,543
  • ARUNACHAL PRADESH325,396
  • NEW DELHI253,075
  • WEST BENGAL231,484
  • ODISHA184,122
  • BIHAR180,788
  • TELANGANA174,774
  • ASSAM156,680
  • KERALA131,027
  • GUJARAT126,169
  • RAJASTHAN116,881
  • HARYANA111,257
  • MADHYA PRADESH103,065
  • PUNJAB97,689
  • CHANDIGARH70,777
  • JHARKHAND69,860
  • JAMMU & KASHMIR62,533
  • CHHATTISGARH52,932
  • UTTARAKHAND27,211
  • GOA26,783
  • TRIPURA21,504
  • PUDUCHERRY18,536
  • HIMACHAL PRADESH9,229
  • MANIPUR7,470
  • NAGALAND4,636
  • ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS3,426
  • MEGHALAYA3,296
  • LADAKH3,177
  • DADRA AND NAGAR HAVELI2,658
  • SIKKIM1,989
  • DAMAN AND DIU1,381
  • MIZORAM1,333
Central Helpline Number for CoronaVirus:+91-11-23978046 | Helpline Email Id: ncov2019 @gov.in, ncov219 @gmail.com

त्योहार नहीं बल्कि 'मातम' का दिन है 'मुहर्रम', जानिए क्यों

  • Updated on 8/29/2020

Navodayatimesनई दिल्ली (टीम डिजिटल)। मुहर्रम मुस्लिम समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से यह पवित्र दिन आमतौर पर मुहर्रम के महीने में 10 वें दिन पर पड़ता ।है साथ ही साथ यह इस्लामिक क्लैंडर का पहला साल माना जाता है। 

मुहर्रम वर्ष के चार पवित्र महीनों में से एक में आता है जिसका अपना अलग  ही  महत्व है। इस बार का मुहर्रम 12 अक्टूबर 2016 को पड़ा है। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि इतने पवित्र अवसर को शिया मुस्लिम समुदाय के लोग शोक के रुप में क्यों मानते है ?

मोहर्रम के महीने में इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 अनुयाइयों का कत्ल कर दिया गया था। हुसैन इराक के शहर करबला में यजीद की फौज से लड़ते हुए शहीद हुए थे।

मुहर्रम हिजरी सवंत का पहला महीना है जिसे शहीद को दी जाने वाली शहादत के रुप में मनाया जाता है। इस माह में 10 दिनों तक पैगम्बर मुहम्मद साहब के वारिस इमाम हुसैन की तकलीफ के शोक में इसे मनाया जाता है।

Navodayatimes

इस दस दिन को इस्लाम में आशुरा कहा जाता है। इसकी शुरुआत का समय 60 वीं हिजरी का था जब कर्बला ने कौहराम मचा रखा था कर्बला को सीरिया के नाम से जाना जाता था। उसकी एक ही इच्छा थी कि वह यजीद इस्लाम का शहनशाह बने जाए जिसके चलते उसने लोगों के अंदर अपना खौफ जमाना शुरू कर दिया।

उसकी बात नहीं मनाने पर वह मासुम लोगों के साथ यातनायें करने से भी नही चुका । लेकिन वहां एक ऐसा वीर भी था जो कभी उसके आगे नहीं झुका और वो थे हजरत मुहम्मद के वारिस इमाम हुसैन और उनके भाई। अपने बीवी बच्चों के हिफाजत करने के लिए इमाम अपने भाईयों के साथ इराक की ओर जा रहे थे उस समय मौक देख के यजीद ने उन पर हमला कर दिया जिस जगह पर यह हमला किया गया वह एक रेगिस्तानी इलाका था जहां पर पानी की सिर्फ एक ही नदी थी जिस जगह पर यजीद ने अपने सिपाहियों को तैनात कर रखा था।

Navodayatimes

लेकिन इसके बावजूद भी इमाम और उनके भाईयों ने हर नहीं मानी उन्होंने 8000 सैनिकों का जमकर मुकाबल किया।इमाम और उनके साथियों को यह बात पता थी कि वह मुकाबल नहीं जीत सकते उसके बावजूद भी भूखे- प्यासे रहाकर भी लङते रहे क्योंकि वह जानते थे कि वह कुर्बन होने के लिए आए है।

मुहर्रम के आखिरी दिन इमाम नदी किनारे नमाज अदा कर रहे थे कि अचानक पीछे से दुश्मनों ने उन पर हमला बोल दिया और इस तरह यजीद इमाम को मारने में कामयाब रहा लेकिन इसके बावजूद भी मारकर भी इमाम जीत का हकदार हो गए और शहीद कहलाए।

 जीत हासिल होने के बावजूद भी यजीद हारा हुआ ही कहलाए। उस दिन से आज तक मुहर्रम को शहीद की शहादत के रुप में मनाया जाता है। मुहर्रम के 9वें, 10वें, और 11 वें दिन उपवास के लिए पवित्र माने जाते हैं लेकिन कुछ लोगों ने इस बार मुहर्रम को कुछ अलग तरह से मनाने का सोचा है।

Navodayatimes

उत्तराखंड के देहरादून जनपद के विकासनगर क्षेत्र के अंबाङा में सदरे अंजुमने हैदरा अंबाड़ी के तरफ से खून बहाने की बजाय रक्तदान देने की नही पहल को शुरूआत की गई है।जिसके चलते मुहर्रम को नए सिरे मनाया जा रहा है ।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.