Saturday, Jul 20, 2019

मोदी सरकार बजट में विज्ञान और अंतरिक्ष विभाग पर नहीं दिखी मेहरबान

  • Updated on 7/6/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को 2019-2020 के लिए 1,901 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। पिछले वित्त वर्ष की आवंटित राशि के मुकाबले इस बार 101 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाले विज्ञान एवं तकनीक विभाग को इस बार 5,880 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में इस विभाग को 5,114 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। 

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इसमें सबसे ज्यादा 124 करोड़ रुपये का आवंटन नेशनल मिशन ऑन इंटरडिसीप्लीनरी साइबरफिजिकल सिस्टम को किया गया है। मंत्रिमंडल ने पिछले साल इस मल्टी डिसीप्लीनरी प्रोग्राम को मंजूरी दी थी। विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाले जैव प्रोद्योगिकी विभाग को 169 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी मिली है। इस बार इसे 2,580 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जबकि पिछले साल इसे 2,411 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। 

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वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) को 4,895 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। पिछले साल इसे 4,572 करोड़ रुपये आ?वंटित किए गए थे। देश में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए इस बजट को बढ़ाने की लगातार मांग हो रही थी।

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बजट में अंतरिक्ष विभाग भी मायूस
अंतरिक्ष विभाग के बजटीय आवंटन में मामूली बढोतरी की गई है जो 2018-19 में 11,200 करोड़ रुपये से बढ़कर 2019-20 में 12,473 करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के मद में करीब 1400 करोड़ रुपये की बढोतरी की गई है। वित्त वर्ष 2018-19 में इस मद में 6992 करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे। वित्त वर्ष 2019-20 में बढ़कर 8407 करोड़ रुपये हो गयी है। 

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अगले सप्ताह भारत के दूसरे चंद्रमा मिशन ‘चंद्रयान-दो’ का प्रक्षेपण करेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर कम खर्चे से उपग्रह तथा अन्य अंतरिक्ष उत्पादों के प्रक्षेपण की क्षमता तथा तकनीक के साथ एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति बनकर उभरा है। 

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उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक रूप से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों की क्षमता का लाभ उठाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र का नया उपक्रम शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विभाग की नई वाणिज्यिक शाखा के रूप में सार्वजनिक क्षेत्र का नया उपक्रम ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ गठित किया गया है। इसके गठन का उद्देश्य इसरो द्वारा किये गये अनुसंधान और विकास के लाभ उठाना है।
 

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