Monday, Mar 30, 2020
narendra modi bjp govt informed 81 thousand posts are vacant in educational institutions

उच्च शिक्षण संस्थाओं में खाली पड़े हैं 80 हजार से ज्यादा पद, संसद में जताई चिंता

  • Updated on 7/4/2019

नई दिल्ली /टीम डिजिटल। शिक्षण संस्थाओं में भर्ती में आरक्षण से जुड़े 200 प्वांइट रोस्टर प्रणाली से संबद्ध अध्यादेश लागू होने के बाद किसी भी शिक्षण संस्था में पुरानी पद्धति से नियुक्तियां होने की आशंकाओं को खारिज करते हुये मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा वित्तपोषित शिक्षण संस्थाओं में लगभग 81 हजार पद रिक्त हैं। 

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निशंक ने राज्यसभा में बृहस्पतिवार को प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में बताया कि केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में सात हजार पद रिक्त हैं और राज्य सरकारों द्वारा वित्त पोषित उच्च शिक्षण संस्थाओं में 74 हजार पद रिक्त है। उन्होंने कहा कि सभी रिक्त पद 200 प्वांइट रोस्टर प्रणाली से ही भरे जायेंगे। इनमें केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की रिक्तियां भी शामिल हैं।

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पद खाली होने पर राज्यसभा में जतायी गई चिंता 
देश के विभिन्न एम्स संस्थानों में बड़ी संख्या में डाक्टरों सहित अन्य पदों के खाली रहने पर राज्यसभा में भाजपा के एक सदस्य ने चिंता जतायी। भाजपा सदस्य प्रभात झा ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया और कहा कि दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयु्र्विज्ञान संस्थान (एम्स) पर भार को कम करने के लिए विभिन्न राज्यों में नए एम्स संस्थान खोलने का फैसला किया गया था। उन्होंने एम्स के प्रति लोगों को भरोसा होने का जिक्र करते हुए कहा कि नए एम्स संस्थानों में पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है। 

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कई नए संस्थाओं में बड़ी संख्या में डाक्टरों सहित अन्य पद खाली हैं। उन्होंने नए संस्थानों में विभिन्न सुविधाएं शुरू करने की मांग की। शून्यकाल में ही भाजपा के अशोक वाजपेयी ने गरीब तबकों को आरक्षण मुहैया कराने के लिए संविधान के 124वें संशोधन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। 

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वाजपेयी ने कहा कि कई शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण का प्रावधान लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि ऐसे संस्थाओं में भी निर्बल आय वर्ग के लोगों को शत प्रतिशत लाभ मिलना चाहिए। शून्यकाल में ही भाजपा के महेश पोद्दार ने कोलकाता में प्रचलित एक परिवहन व्यवस्था का जिक्र किया जिसके तहत एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को ढोया जाता है। 

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उन्होंने यह प्रथा समाप्त करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस रिक्शा व्यवस्था में लगे लोगों को आजीविका का अन्य विकल्प मिलना चाहिए। मनोनीत स्वप्न दासगुप्ता ने बंगाल में विभिन्न योजनाओं में कथित कट मनी का मुद्दा उठाया।  भाजपा नेता के जे अल्फोंस, कांग्रेस के जयराम रमेश और अन्नाद्रमुक के एस मुथुकरूप्पन ने विशेष उल्लेख के जरिए लोक महत्व के अपने अपने मुद्दे उठाए। 

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