Sunday, Jul 03, 2022
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National anthem played in Nagaland assembly after years video went viral prshnt

नागालैंड की विधानसभा में सालों बाद बजा राष्ट्रगान, सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो, जानें कारण

  • Updated on 2/20/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। नगलैंड (Nagaland) के इतिहास में पहली बार राष्ट्रगान (National Anthem) बजाया गया। नगालैंड विधानसभा में इस साल 12 फरवरी को नया इतिहास दर्ज हुआ जब पहली बार विधानसभा में इस दिन राष्ट्रगान बजाया गया। इसी के साथ ट्विटर पर #NationalAnthem ट्रेंड हो रहा है। इस कार्यक्रम का वीडियों तेजी से वायरल हो रहा है। 13वीं विधानसभा के सातवें सत्र में नगालैंड के राज्यपाल आरएन रवि के संबोधन के दौरान जन-मन-गण बजाया गया जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

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राष्ट्रगान बजाये जाने पर लोगों ने जाहिर की खुशी
वीडियों में दिख रहा है कि राज्यपाल का अभिभाषण शुरू होने से पहले सदन में राष्ट्रगान बजाया गया और सभी राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े हुए, नगालैंड के गठन के इतने साल इस तरह से राष्ट्रगान बजाये जाने पर लोगों ने खुशी जाहिर की है। सोशल मीडिया यूजर और रक्षा विश्लेषक नितिन ए गोखले ने वीडियो शेयर कर खुशी जाहिर की।

वहीं विधानसभा आयुक्त और सचिव डॉ. पीजे अंटनी ने इसकी पुष्टि की और कहा कि अज्ञात कारणों से नगालैंड विधानसभा में कभी भी राष्ट्रगान नहीं गाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि लेकिन इस पर ज्यादा पढ़ने के लिए कुछ नहीं है क्योंकि जब इतने साल बाद राज्यपाल के अभिभाषण में राष्ट्रगान शामिल किया गया तो सभी सदस्यों ने इसका स्वागत करते हुए अच्छा आचरण किया। 

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नगालैंड के सेवानिवृत्त कमिश्नर ने कही ये बात
इसके अलावा नगालैंड के सेवानिवृत्त कमिश्नर और पूर्व राज्यपाल का कहना है कि उनके समय में ऐसा कोई नियम नहीं था और न ही उनके कार्यकाल में इसका अभ्यास हुआ। उन्होंने कहा हालांकि इसके पीछे ठोस कारण भी नहीं है। लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण में इसे शामिल करने में कुछ भी गलत नहीं है। बता दें कि तीन साल पहले त्रिपुरा में सरकार बदलते ही पहली बार विधानसभा में राष्ट्रगान गाया गया था।

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लंबे समय से चल रहा है जातीय संघर्ष के कारण विद्रोह
बता दें कि जब देश आजाद हुआ था तब नगालैंड असम प्रांत का हिस्सा था। नगालैंड को राज्य का दर्जा 1 दिसंबर 1963 को प्राप्त हुआ था। 1950 तक यहां इस क्षेत्र में अंतर जातीय संघर्ष के कारण विद्रोह चलता रहा।

नगालैंड में हिंसा के चलते ये विकास से कोसों दूर था। इसके बाद 1 दिसंबर 1963 को इसे अलग राज्य का दर्जा मिला और इसी के साथ कोहिमा को राजधानी चुना गया। जनवरी 1964 में चुनाव के बाद लोकतांत्रिक रूप से सरकार चुनी गई और 11 फरवरी 1964 को विधानसभा का गठन हुआ।

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