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दो बार मौका चूक गये प्रणब मुखर्जी, बेहद करीब होते हुए भी इस वजह से नहीं बन सके देश के प्रधानमंत्री

  • Updated on 9/1/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) अब हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन प्रणब मुखर्जी को उनके राजनीतिक कार्यों और उसकी समझ के लिए जाना जाता रहेगा। प्रणब मुखर्जी के बारे में कहा जाता है कि उन्हें कभी किसी पद और किसी भी चीज का लोभ नहीं रहा। 

राजनीती में एक समय ऐसा भी आया था जब उन्होंने अपनी पार्टी, कांग्रेस को भी छोड़ दिया था और अपनी अलग पार्टी बना ली थी। कहा जाता है कि उन्हें दुःख था कि उनके सबसे प्रबल दावेदार होने के बाद भी उन्हें प्रधानमंत्री पद नहीं दिया गया। 

प्रणब दा वित्त मंत्री के तौर पर कैबिनेट में बने रहे और उन्हें कई बड़ी जिम्मेदारियां भी दी गईं लेकिन उनका पीएम न बन पाना एक सपना ही रह गया।

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इंदिरा गांधी की हत्या 
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस में पीएम पद को लेकर गहरा मंथन चल रहा था। उस समय इंदिरा गांधी के सबसे करीबी और पार्टी के सीनियर सदस्य प्रणब मुखर्जी ही थे। लेकिन तब राजीव गांधी को जल्दबाज़ी में पीएम बना दिया गया। 

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उस वक्त प्रणब दा को इस बात का दुःख हुआ कि राजीव गांधी एक अनुभवहीन महासचिव और संजय गांधी के निधन के कुछ ही समय बाद पार्टी में आए थे। इससे पहले भी सरकार के किसी भी कामकाज में वो दखल नहीं देते थे और न ही उनका कोई अनुभव था।

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बनाई थी नई पार्टी
राजीव गांधी के पीएम बनने और फिर उनकी कैबिनेट में प्रणब को जगह न मिलने से वो काफी नाराज हो गए थे और उन्होंने कांग्रेस को छोड़ दिया और अपनी अलग राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी बना ली थी। हालांकि पार्टी बनाने के बाद भी वो कुछ खास नहीं कर सके थे। इसके बाद उन्होंने मजबूरन 1989 में अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में ही कर दिया था। 

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इसके बाद राजीव गांधी की हत्या हुई और नरसिंहराव की सरकार बनीं। यही वो समय था जब वो फिर से कांग्रेस में आ गए लेकिन उन्हें इस बार भी सरकार में जगह नहीं मिली। लेकिन नरसिंहराव ने उन्हेंम योजना आयोग का उपाध्यक्ष बना दिया था और फिर इसी सरकार के अंतिम वर्ष में विदेश मंत्री बनाया गया।

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दूसरी बार भी चूके 
फिर जब कांग्रेस की सत्ता गई और फिर 2004 में यूपीए के तहत कांग्रेस की सत्ताक में वापसी हुई तब सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) चाहते हुए भी पीएम नहीं बन सकीं, जिसके पीछे कई पेंच थे। ऐसे में सोनिया गांधी ने अपनी जगह मनमोहन सिंह को पीएम बनाया जबकि इस बार भी दावेदार और वरिष्ठ होने के नाते प्रणब मुखर्जी को ये मौका मिलना चाहिए था लेकिन सोनिया गांधी को प्रणब दा पर विश्वास नहीं था। उन्हें सरकार ने वित्त मंत्री के तौर पर जगह मिली। 

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इसके बाद कांग्रेस ने साल 2012 में उन्हें राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया और वो देश के 13वें राष्ट्रपति बने। साल 2019 में उन्हें भारत रत्न से भी नवाजा गया था।

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