Thursday, Mar 04, 2021
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रूस की कोरोना वैक्‍सीन का क्यों विरोध कर रहे हैं कई देश और क्‍या है फेज-3 ट्रायल...

  • Updated on 8/14/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना महामारी अब तक 8 लाख लोगों से ज्यादा की जान ले चुकी है। हालांकि दुनियाभर के देश इसके इलाज का टीका विकसित करने में लगे हैं लेकिन फिर भी अभी तक कहीं से कोई सफलता मिलती नजर नहीं आ रही है।

इस बीच रूस ने कोरोना की वैक्सीन बना कर नई उम्मीद जगाई है। इस वैक्सीन का नाम नाम Sputnik V रखा गया है, जो पहले रूसी उपग्रह के नाम पर रखा गया है। लेकिन रूस की वैक्सीन को लेकर कई देश सवाल खड़े कर रहे हैं। इन देशों में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और कनाडा शामिल हैं।

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क्यों हो रहा है विरोध
रूस की बनाई कोरोना वैक्सीन का कई देश विरोध कर रहे हैं। इन देशों का कहना है कि इस वैक्सीन ने ट्रायल की तीसरी स्टेज को पूरा नहीं किया है। ऐसे में ये वैक्सीन नुकसान पहुंचा सकती है।

दरअसल, किसी भी दवा को बाजार में लाने से पहले इस बात को सुनिश्चित कर लिया जाता है कि वो दवा पूरी तरह से सेफ हो, उसके सभी ट्रायल पूरे किए हों, लेकिन रूस की कोरोना वैक्सीन पर भरोसा कर पाना कई देशों के लिए मुश्किल हो रहा है।  

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क्या है 3 स्टेज ट्रायल
किसी भी दवा को लोगों के इस्तेमाल करने लायक बनाने के लिए उस दवा के चरणबद्ध तरीके से ट्रायल होना बेहद जरूरी है। सबसे पहले किसी दवा का प्री क्‍लीनिकल और क्‍लीनिकल होता है। इसमें शुरुआत ट्रायल होते हैं जो जानवरों पर किए जाते हैं, जैसे- चूहे, बंदर आदि। इसके बाद ह्यूमन ट्रायल की बारी आती है जिसे 3 स्टेज ट्रायल कहा जाता है जो बेहद जरूरी होता है क्योंकि इसी ट्रायल के नतीजे दवा को विश्वसनीय बनाते हैं।

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3 स्टेज ट्रायल बेहद जरूरी
इस स्टेज में इंसानी ट्रायल होते हैं। जिसके नतीजे ही दवा को आगे बाजार में उतारने लायक बनाते हैं। इसके लिए अधिक से अधिक ट्रायल होना बेहद जरूरी है। इस स्टेज में भी फेज 1 और 2 होते हैं, जिनक नतीजों के परिणामों को विस्तार से जांचा जाता है। इस स्टेज में 1000 से लेकर 3000 तक लोगों पर किया जाना जरूरी होता है, इससे ज्यादा होना बेहद सुरक्षित माना जाता है। इसमें स्टेज में शामिल लोगों का दवा के ट्रायल होने के दौरान रोजाना चेकअप किया जाता है।

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3 स्टेज के बाद....
तीसरी स्टेज के बाद चौथा ट्रायल शुरू होता है जिसमें हजारों लोगों पर दवा का टेस्ट किया जाता है और उनसे मिले परिणामों का बड़े लेवल पर विश्‍लेषण किया जाता है। इस बीच सभी इफ़ेक्ट और साइड इफ़ेक्ट पर भी काम किया जाता है और दवा की कमियों को पूरा करने की कोशिश सम्बंधी जानकारी दी जाती है। इसी ट्रायल के पूरा होने के बाद दवा बाजार में आने के लिए तैयार हो जाती है।

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