Wednesday, Jun 19, 2019

Navratri special: माता दुर्गा के चौथे रूप कुष्मांडा की पूजा इस मंत्र के बिना है अधूरी

  • Updated on 4/8/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्र या चैत्र नवरात्र की धूम हर तरफ मची हुई है। कल माता के चौथे रूप यानि की कुष्मांडा की पूजा की जाती है।  ऋषि -मुनियों का कहना है कि जब इस सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं था उस वक्त माता कुष्मांडा ने इस ब्रह्मांड की  रचना करने में काफी मदद की थी जिसके लिए उन्हें आदिशक्ति भी कहा जाता है। 
माता कुष्मांडा को प्रश्न करने के लिए एक विशेष तरह मंत्र का उच्चारण करना पड़ता है जिसके उच्चारण से आप दुष्ट प्रभाव से दूर रहते हैं। इस दिन मनुष्य को इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।

मंत्र-

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इसके साथ ही अगर पुजा समाप्त होने पर माता कुष्मांडा की आरती की जाती है क्योंकि उनकी आरती कि बिना आप की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है।


माता कुष्मांडा  की आरती


कूष्मांडा जय जग सुखदानी।

मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी माँ भोली भाली॥

लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

माँ के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो माँ संकट मेरा॥

मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥

तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
 

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