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Exclusive Interview : यह वक्त एक-दूसरे की गलती निकालने का नहीं- प्रफुल्ल पटेल

  • Updated on 5/12/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। एन.सी.पी. नेता, सांसद, पूर्व सिविल एविएशन मंत्री और ऑल इंडिया फुटबॉल फैडरेशन के प्रैजीडैंट प्रफुल्ल पटेल (Praful Patel) महाराष्ट्र की सियासत के बड़े चेहरे हैं। हाल ही में हजूर साहिब (नांदेड़) से पंजाब के श्रद्धालुओं की वापसी के बाद पंजाब में बढ़े कोरोना (coronavirus) मरीजों को लेकर पंजाब व महाराष्ट्र सरकार के बीच तनातनी की नौबत आ गई। इसको लेकर और देश के मौजूदा हालात समेत तमाम राजनीतिक व आर्थिक मामलों पर उन्होंने अपना बेबाक नजरिया रखा। पेश हैं पंजाब केसरी/ नवोदय टाइम्स/ जगबाणी/ हिंद समाचार से उनकी खास बातचीत के प्रमुख अंश...

प्रश्न : कोरोना वायरस को लेकर पंजाब सरकार ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा था, जब श्री हजूर साहिब से श्रद्धालुओं को वापस पंजाब ले जाया गया। इस मामले पर आपका क्या कहना है?
उत्तर: यह समय एक-दूसरे पर आरोप लगाने या गलतियां निकालने का नहीं है। राज्य एक-दूसरे को सहयोग दे रहे हैं, इस समय यही अच्छी बात है। ऐसा नहीं करेंगे तो समस्या से बाहर नहीं निकल पाएंगे। पंजाब के श्रद्धालु फंसे हुए थे और अपने राज्य वापस जाना चाहते थे तो यहां की सरकार ने एक अच्छे विश्वास के साथ उन्हें भेजने का काम किया। पंजाब में कई बच्चे महाराष्ट्र के फंसे हुए थे, वह भी वापस आए। लोग पहले पैदल भी जा रहे थे। वह काफी दुखद था। बीमारी कहां से, कैसे फैली, इस बारे में किसी को सही जानकारी नहीं है। कुछ बातों को वैज्ञानिक रूप और एक-दूसरे को सहयोग देकर भी समझना पड़ेगा।

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प्रश्न : कोरोना वायरस से महाराष्ट्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। 16 हजार से ज्यादा मामले और 600 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। आप पूरे मुल्क के हालात व महाराष्ट्र के हालात को कैसे देखते हैं?
उत्तर: इसमें कोई शक नहीं है कि महाराष्ट्र में कोरोना मरीजों की संख्या ज्यादा है। इसके दो कारण हो सकते हैं। एक तो यह कि मुंबई इंटरनैशनल सिटी है। इंडिया का गेटवे है। दूसरा यह कि काम के लिए पूरे देश से भी लोग मुम्बई आते हैं। भारत की जनसंख्या लगभग 135 करोड़ है। उस हिसाब से देखा जाए तो देश में अभी तक महामारी के हालात कम हैं। कोरोना को फैलने से रोकने के लिए सभी राज्यों और केंद्र की हुकूमत ने मिलकर अच्छे कोआर्डीनेशन से काम किया है। अब इसमें कामयाबी कितनी मिली है, यह बाद में पता लगेगा। लॉकडाऊन कुछ हद तक आवश्यक भी था। लॉकडाऊन के चलते मैडीकल फैसिलिटीज, आई.सी.यू., आइसोलेशन वार्ड्स, पी.पी.ई. किट्स, वैंटीलेटर्स, दवाइयों आदि के इंतजाम पर भी फोकस किया जा सका। अब मास्क और अन्य बचाव जरूरत की सब चीजों को लेकर करीब-करीब सभी राज्यों में तैयारी हो चुकी है। लोगों में अवेयरनैस भी आ गई। वैक्सीन और इलाज को लेकर भी गति से काम शुरू हो चुका है। यह पहली बार है कि दुनिया के 80 देशों की कई यूनिवर्सिटीज में रिसर्च चल रही है। उम्मीद है कि दो से चार माह में इसका इलाज खोज लिया जाएगा।

प्रश्न : एविएशन सैक्टर में पहले ही कुछ एयरलाइंस बंद हो गई हैं। अब हालात और खराब हो गए। महामारी का बोझ में अब यह कैसे पुनर्जीवित हो पाएगा?
उत्तर:  एविएशन एक ऐसा सैक्टर है, जो बड़े कम मार्जिन पर काम करता है। लीज पर हवाई जहाज लेकर  कम्पनी शुरू करना बहुत आसान है। पूरी दुनिया में देखें तो एविएशन की बहुत कम कम्पनियां हैं, जो निरंतर कमाती रही हैं और सेवाएं देती रही हैं। कई कम्पनियां बंद हो गई हैं या उनका विलय हो गया। भारत में पिछले चार-पांच साल से समस्याएं खड़ी हो गई थीं। लगभग सभी एयरलाइंस समस्याएं झेल रही हैं। पिछले साल एयर इंडिया को बेचने के लिए टैंडर निकालने की पेशकश हो रही थी। एविएशन कुछ वर्गों के लिए ही यातायात का साधन है, ऐसा नहीं है। इस समय यह एक जरूरत की बात हो गई है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू कनैक्टीविटी नहीं दे पाएंगे, उसका भी देश के विकास पर असर पड़ेगा। यह चिंता का विषय है। सरकार ने सही कदम नहीं उठाए तो इस सैक्टर में हालात को सामान्य कर पाना मुश्किल हो जाएगा।     
प्रश्न : महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सरकार बनाने का चमत्कार जो शरद पंवार ने किया है, क्या वह पांच साल तक बरकरार रहेगा?
उत्तर: बिल्कुल रह सकता है और रहेगा। महाराष्ट्र के हित में एक बड़ी रुचि के साथ सब मिलकर काम करें। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर चलने की कोशिश करेंगे तो कोई भी गठबंधन चलता है। शिवसेना ने भी अपने एजैंडों में बदलाव किए हैं।

प्रश्न : राज्य सरकारें केंद्र पर जी.एस.टी. का बकाया और अनुदान राशि बकाया भुगतान न करने को लेकर आर्थिक असहयोग का आरोप लगाती रही हैं। आप सहमत हैं?
उत्तर: जब से जी.एस.टी. आया है राज्य सरकारों के राजस्व का अधिकांश  (80 से 90 प्रतिशत) स्रोत उस नियम के अंतर्गत हो गया। कलैक्शन के बाद पैसा दिल्ली जाएगा और वहां से राज्य को हिस्सा मिलेगा। जी.एस.टी. के बाद राज्य सरकारों को समय पर जो राशि मिलनी चाहिए, वह मिलती नहीं है। यह भी चिंताजनक है। राज्य सरकारों के पास राजस्व के स्रोत काफी सीमित हो गए हैं, जिस कारण उन पर काफी दबाव बन रहा है। राजस्व के बिना देश या राज्य चलाना संभव नहीं है। राज्य सरकारें विकलांग हो गई हैं, क्योंकि उन्हें राजस्व सिर्फ केंद्र सरकार से ही मिल रहा है।  

प्रश्न : आपको पी.एम. मोदी का करीबी और अजीज कहा जाता है। खबरें आईं कि शिवसेना संग सरकार बनाने के फैसले से आप खुश नहीं हैं। असल स्थिति क्या है?
उत्तर:
देखिए, राजनीति में सभी एक-दूसरे को व्यक्तिगत तरीके से जानते हैं, पहचानते हैं और संबंध रखते हैं। वैसे ही उनके साथ निजी संबंध अच्छे रहे हैं। लगभग 25 साल से ज्यादा से उन्हें जानता हूं। यह सब निजी स्तरीय है। इसके अलावा राजनीति में जहां तक है अपनी पार्टी और नेता की मर्यादा के अनुसार ही चलेंगे और चलते आए हैं। ऐसी कोई बात नहीं है कि खुश और नाखुश, यह सब बातें किसी ने उड़ा दीं, बल्कि शरद पंवार के साथ पिछले 40 साल से हूं, जबसे राजनीति शुरू की है। ऐसी कोई बात नहीं है। ‘फुटबॉल का परिपेक्ष अलग है’

प्रश्न: आप ऑल इंडिया फुटबॉल फैडरेशन के प्रैजीडैंट भी हैं। देश में जैसा जुनून क्रिकेट को लेकर देखा जाता है,  फुटबॉल को लेकर वैसा नहीं है। ऐसा क्यों?
उत्तर: क्रिकेट पिछले 25-30 साल में देश में पॉपुलर हो गया है। हमारे यहां विश्व दर्जे के खिलाड़ी तैयार हुए हैं। फुटबॉल का परिपेक्ष अलग है। सबसे प्रतिस्पर्धात्मक खेल दुनिया में फुटबॉल है। पिछले 40 साल के दौरान फुटबॉल में गिरावट की जिम्मेदारी नहीं ले सकता लेकिन इतना कहूंगा कि फुटबॉल को आगे बढ़ाने के लिए जिम्मेदारी स्वीकार की है। यह काफी कठोर चुनौती है। क्रिकेट विश्व के 8-10 मुल्कों में खेला जाता है और फुटबॉल हर मुल्क में खेला जाता है। उसकी प्रतिस्पर्धा का स्तर अलग है। जमीनी स्तर से फुटबॉल के विकास की शुरूआत की है। बच्चों को विकसित कर उनका स्तर बढ़ाने का काम कर रहे हैं। वर्ष 2017 में लड़कों के लिए वल्र्ड कप अंडर-17 का आयोजन किया था। इसी वर्ष लड़कियों के लिए प्रस्तावित है। 

प्रश्न: कोरोना से खेल को नुक्सान हुआ। कई लीग की तैयारियां चल रही थीं। आर्थिक-पेशेवर स्तर पर कितना नुक्सान हुआ है?
उत्तर: बहुत नुक्सान हुआ है, इसमें कोई शक नहीं है। हर खिलाड़ी का करियर होता है। अब सभी टूर्नामैंट रद्द हो गए हैं। अब नियमों के अनुसार देखेंगे और कहीं न कहीं से फिर शुरुआत करनी पड़ेगी।

प्रश्न : कई राज्य खेल में पिछड़ गए हैं। राज्य सरकारों के लिए चैलेंज था खिलाडिय़ों को आगे लेकर आना। अब कोरोना महामारी के कारण मुश्किल होगा?
उत्तर:
यह बात सही है, क्योंकि खिलाड़ी की एक गति होती है, लगातार ट्रेनिंग होती है। अब काफी नुक्सान होगा। एक-दो महीना तो चल सकता है लेकिन ज्यादा बढ़ गया तो खिलाडिय़ों पर असर पड़ेगा। उनकी फिटनैस, टे्रनिंग और स्किल्स को वापस उसी रफ्तार पर लेकर आने में काफी समय लगेगा। स्टेडियम में दर्शक नहीं होंगे तो खिलाड़ियों के जोश में काफी फर्क पड़ेगा।

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