Friday, Jan 21, 2022
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Need to make Indian knowledge tradition expedient: Prof. ambikadutt

भारतीय ज्ञान परंपरा को समीचीन बनाने की जरूरत : प्रो. अम्बिकादत्त

  • Updated on 11/5/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। हम लोगों ने आदि गुरू शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत को एक मोक्ष शास्त्र बनाकर रख दिया है। लेकिन हम लोगों ने अपनी समृद्धि दार्शनिक ज्ञान परंपरा को कभी साभ्यतिक, शाब्दिक रूप से समसामयिक बनाने का प्रयास नहीं किया। विगत् 150 वर्षों से इस ज्ञान परंपरा के लिए पुर्नरचना नहीं की गई। इसका मतलब यही है कि पिछले डेढ़ शताब्दी से हमने कभी अपनी ज्ञान परंपरा को समीचीन बनाने का प्रयास नहीं किया।

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आईजीएनसीए में 3 दिवसीय आदि शंकराचार्य व्याख्यानमाला हुई शुरू
यह बात इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के कलाकोश विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय आदि शंकराचार्य व्याख्यानमाला के उद्घाटन सत्र में शुक्रवार को हरिसिंह गौर विवि. सागर मध्य प्रदेश के दर्शन विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो. अम्बिका दत्त शर्मा ने अद्वैत वेदांत सार्वभौमिक एकात्मता का दर्शन विषय पर व्याख्यान देते समय कही। उन्होंने 1936 में पेरिस के एक रेस्त्रां में फ्रांसीसी विचारक और उपन्यासकार एंडरे मोलरोक्स की द्वारा भारत की आजादी के बाद अद्वैत वेदांत को अपनाने को लेकर तत्कालीन नेता पं जवाहरलाल नेहरू से की गई गुजारिश और आजादी के बाद जय प्रकाश से उसी रेस्त्रां में एंडरे की मुलाकात का वाक्या पेश किया।

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शंकराचार्य के सपने पर काम करने की जरूरत 
उन्होंने कहा कि हमें पाश्चात्य संस्कृति के विद्वानों से उनकी संस्कृति और मूल्यों को समीचीन बनाने को लेकर लगातार किए जा रहे काम से प्रेरणा लेनी चाहिए। तो आज हमें अद्वैत वेदांत को विश्व को एकात्म करने के आदि शंकराचार्य के सपने पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत और विश्व के संदर्भ में अद्वैत वेदांत को एक वैकल्पिक सभ्यता शोध बनाकर पेश करने की जरूरत है।

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आईजीएनसीए ने शंकराचार्य के जीवन पर बनी 3 मिनट की एनिमेशन का किया लोकार्पण
इस अवसर पर आईजीएनसीए द्वारा राष्ट्रनिर्माता जगद्गुरु शंकराचार्य पर 3 मिनट के एक एनिमेशन का लोकार्पण किया गया। व्याख्यानमाला में कुलाधिपति महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय और पीठ आचार्य बीएचयू के प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी ने अध्यक्षता करते हुए आदि शंकराचार्य पर प्रकाश डाला। इस व्याख्यान श्रृंखला में शनिवार को भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता में आदि गुरु शंकराचार्य जी का योगदान विषय पर जेएनयू प्रो. रामनाथ झा का व्याख्यान होगा।

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