Wednesday, Jun 26, 2019

युवा पीढ़ी को नशों की लत से बचाने की जरूरत

  • Updated on 6/13/2019

एक दिन मैं युवाओं पर एक कार्यक्रम देख रही थी, जो ड्रग्स की लत से बाहर निकालने के लिए मदद हेतु रो रहे थे। वे पंजाब में होशियारपुर के नजदीक एक छोटे गांव से संबंधित थे। यह मेरे जीवन के सबसे दुखदायी पलों में से एक था जब मैंने इन तीन अच्छे दिखते लड़कों को वास्तव में किसी से उनकी मदद के लिए याचना करते देखा और  उन जैसे बहुत से अन्य लड़के जो एडिक्ट बन चुके हैं। यह एक जानी-मानी कहानी है कि पंजाब तथा अब हरियाणा व हिमाचल की सीमाओं पर रहते अधिकतर युवा इस गम्भीर बीमारी के शिकार होते जा रहे हैं और अपने जीवन के साथ खेल रहे हैं। उनमें से एक युवक की मां रो-रोकर बेहाल थी और तब तक रोती रही जब तक बेहोश नहीं हो गई।

किसी मां के लिए इसकी स्वीकारोक्ति करना भी हृदयविदारक पल होता है। ड्रग्स की यह समस्या पंजाब में दशकों से है। कई सरकारें आईं और चली गईं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उन सभी ने नौकरियां पैदा करने का वायदा किया, उन्होंने ड्रग्स की आपूॢत करने वालों के खिलाफ सतर्क रहने और कार्रवाई करने का भरोसा दिया। ये ड्रग्स आती कहां से हैं? ये कहां बनती हैं? और ये इतनी आसानी से कैसे उपलब्ध हो जाती हैं? 

यह एक ऐसी स्थिति है जिसने गांवों को बर्बाद कर दिया, फिर भी बचाव के लिए कोई नहीं आया। बहुत से गांवों में युवा विधवाएं हैं। बूढ़े मां-बाप की देखभाल करने वाला कोई नहीं, कोई आसरा नहीं, भोजन नहीं मगर एक बेटा है, जो बेपरवाह है। दरअसल वे मदद के लिए दूसरों के दरवाजे खटखटा रहे हैं। मेरा मानना है कि सरकार को डाक्टर उपलब्ध करवाने चाहिएं जो गांव-गांव, घर-घर जाकर उन्हें समझाएं तथा घर पर ही उन्हें नि:शुल्क चिकित्सा भी उपलब्ध करवाएं। इस लत से छुटकारा पाने में मदद के लिए प्रत्येक गांव में कैम्प लगाए जाने चाहिएं। हर कोई ऐसे कैम्पों में नहीं जा सकता लेकिन पंजाब सरकार तथा भारत सरकार को चाहिए कि इस पीढ़ी को बचाने हेतु वे रोजमर्रा, प्रत्येक घंटे के आधार पर मदद उपलब्ध करवाएं।

दिल्ली, मुम्बई तथा अन्य बहुत से महानगरों में भी यह युवाओं में बढ़ रही एक समस्या है। निश्चित तौर पर दिल्ली में यह एक फैशन बन गया है। मैंने सुना है कि फार्म हाऊसिज तथा निजी घरों में भी युवाओं की पाॢटयों में मैन्यू के एक हिस्से के तौर पर इन्हें सर्व किया जाता है। मुझे नहीं पता कि सर्व की जाने वाली ड्रग्स कितनी खतरनाक हैं लेकिन इसे एक कड़ी सजा वाला कृत्य घोषित किया जाना चाहिए। रोजमर्रा के आधार पर छापे मारे जाने चाहिएं ताकि लोगों में डर पैदा हो।

स्कूलों तथा कालेजों में नशे एक सार्वजनिक तथ्य है लेकिन वे इन्हें कहां से प्राप्त करते हैं? उन्हें धन कौन देता है? मैं नहीं समझ सकती और निश्चित तौर पर जो बच्चे इसके शिकार होते हैं, उनके पास नाखुश तथा टूटे परिवारों वाले घरों से आने, शिक्षा को लेकर निराशा तथा अत्यंत दबाव का बहाना होता है। मैं समझती हूं कि कुछ अभिभावक इतने व्यस्त होते हैं कि अपने बच्चों की देखभाल नहीं कर सकते और उन्हें अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास करते हैं लेकिन बेहतर होगा कि उन्हें ऐसी सुविधाएं कम दी जाएं मगर प्रेम व लगाव अधिक तथा उन पर ध्यान दिया जाए। यह जानना अच्छा है कि स्कूल भी अधिक सतर्क रहने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन ड्रग तस्कर अधिक चतुर हैं। यह प्रत्येक अभिभावक के लिए एक खौफनाक स्थिति है क्योंकि रात को घर से बाहर रहने, जन्मदिन की पाॢटयों तथा ऐसी चीजों को लेकर हम दबाव में होते हैं।

ड्रग की इस लत के कारण मेरी एक मित्र ने अपना बेटा खो दिया, जो इस स्थिति में पहुंच गया था कि नशे का सामान खरीदने के लिए वह घर से चीजें चुराने लगा था। उसे किसी से मदद नहीं मिली, न कोई पुनर्वास केन्द्र, न डाक्टर। इस सबके कारण सारा परिवार बर्बाद हो गया। मां टूट चुकी है और पिता युवा बेटे की मौत के सदमे से बाहर नहीं आ सकता। यह हर किसी के लिए एक सबक होना चाहिए मगर ऐसा है नहीं। वे केवल दुर्भाग्य को दोष देते हैं।

पंजाब तथा कई अन्य स्थानों पर ड्रग्स आसानी से उपलब्ध हैं। सस्ती और एक बार आपको इसकी लत पड़ गई तो कितनी भी महंगी हो, आपको खरीदना ही है। इसलिए यदि उन्हें धन न दिया जाए तो चोरी एक आसान काम है। मैं चाहती हूं कि सरकार को जितनी जल्दी हो सके इस समस्या से छुटकारा पाना चाहिए और यह केवल ड्रग तस्करों को कम से कम उम्रकैद की सजा देकर और नशे के शिकार लोगों को नि:शुल्क चिकित्सा सहायता, जागरूकता तथा नौकरियां उपलब्ध करवा कर किया जा सकता है।                 -देवी चेरियन

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.