Sunday, Nov 27, 2022
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neet exam result: nta moves supreme court against bombay high court''''s decision

नीट परीक्षा परिणाम : बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई एनटीए

  • Updated on 10/25/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 22 अक्तूबर को देशभर के 3800 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित किए गए मेडिकल प्रवेश परीक्षा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश एग्जाम (नीट-यूजी) के रिजल्ट को लेकर छात्रों का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। जबकि 11 अक्तूबर को आयोजित की गई नीट पीजी परीक्षा के नतीजे एक हफ्ते पहले ही घोषित किए जा चुके हैं। नीट परीक्षा परिणामों पर एनटीए के एक अधिकारी ने कहा कि नीट रिजल्ट इसी माह घोषित किया जाना था।

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केंद्र ने कहा कि रिजल्ट तैयार, लेकिन लंबित फैसले के कारण नहीं कर सकते घोषित
लेकिन दो उम्मीदवारों के कारण बॉम्बे हाई कोर्ट ने परीक्षा प्रक्रिया पर एनटीए को आदेश जारी किया है। जिसके खिलाफ एनटीए अब सुप्रीम कोर्ट चला गया है। वहीं केंद्र सरकार ने नीट रिजल्ट 2021 पर कहा कि नीट परीक्षा के नतीजे तैयार हैं लेकिन मामला अदालत में विचाराधीन होने से घोषित नहीं किए जा सकते। केंद्र ने कहा कि नतीजों में देरी से मेडिकल कोर्स एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएसएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस आदि की दाखिला प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ रहा है।

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दो छात्रों को मिली थी गलत आंसर शीट और पेपर, चले गए थे बॉम्बे हाई कोर्ट 
बीते हफ्ते बॉम्बे हाई कोर्ट ने एनटीए से कहा था कि जिन दो छात्रों को प्रश्नपत्र और आंसर शीट गलत सीरियल नंबरों में दी गई उनके लिए दोबारा परीक्षा का आयोजन किया जाए। दरअसल दो छात्रों को एक ही कोड के प्रश्नपत्र और आंसर शीट दी गई थी लेकिन पर्यवेक्षकों के कारण कुछ छात्रों को अलग अलग कोड के पेपर और आंसर शीट दी गई। वकील पूजा थ्रोट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता ने पर्यवेक्षकों से इस बारे में बात की तो उन्होंने परीक्षा में व्यवधान डालने का आरोप लगाने की बातकही।

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केंद्र ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का भविष्य में छात्र कर सकते हैं दुरुपयोग
एनटीए की ओर से आयी वकील रुई रोड्रिग्स ने कहा कि दो छात्रों के लिए दोबारा एग्जाम कराना संभव नहीं हैं। अदालत ने कहा कि छात्र परीक्षा आयोजनकर्ताओं की गलती के कारण भुगत नहीं सकते। इसके बाद एनटीए को बॉम्बे हाई कोर्ट ने निर्देश दिए कि एक हफ्ते में दोनों छात्रों के लिए एग्जाम आयोजित कर दो हफ्तों में नतीजे घोषित करें। केंद्र सरकार का कहना है कि इस तरह के फैसले का भविष्य में छात्र गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।

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