पुण्यतिथि: बहुत खुशमिजाज थे नेल्सन मंडेला, ऐसे रखी नए अफ्रीका की नींव

  • Updated on 12/5/2018

जिंदगी को जीने के लिए जज्बे और जुनून की जरूरत होती है फिर ये कोई मायने नही रखता कि आप कोई छोटा काम कर रहे हो या बड़ा

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। ये शब्द है दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के। उनका नाम दुनिया के बेहतरीन राजनेताओं में शुमार किया जाता है। अफ्रीका के गांधी कहे जाने वाले इस महापुरुष की आज पुण्यतिथि है।

वह 95 साल के थे जब उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा था। वह जीवनभर रंगभेद विरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ते रहे। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में अश्वेतों को उनके अधिकार दिलाए। यह उनके संघर्ष का परिणाम है कि आज दुनिया से नस्लीय भेदभाव पूरी तरह खत्म होने की कगार पर है।

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नेल्सन मंडेला फेफड़ों के संक्रमण से ग्रस्त थे और लंबी बीमारी के बाद 5 दिसंबर 2013 में उनका निधन हो गया था। उन्होंने हमेशा लोगों की भलाई के लिए काम किया। उन्हें शांति का दूत कहा जाता था। वह दुनियाभर के लोगों के लिए प्ररेणा रहे हैं। उनके विचार लोगों को एक नई दिशा देते रहे हैं। 

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बहुत खुशमिजाज थे नेल्सन मंडेला
दक्षिण अफ्रीका में रंगभेदी सरकार की जगह एक लोकतांत्रिक बहुनस्ली सरकार बनाने के लिए नेल्सन मंडेला ने बहुत लंबा संघर्ष किया जिसके लिए वह 27 साल तक जेल में रहे। 

ऐसा कहा जाता है कि जिन लोगों ने उन्हें जेल में बंद रखा उनके प्रति भी मंडेला के मन में कोई कड़वाहट नहीं आई। वह हमेशा खुशमिजाज नजर आए। 

नए अफ्रीका की रखी नींव
9 साल की उम्र में नेल्सन मंडेला के पिता का देहांत हो गया,जिसके कारण घर की सारी जिम्मेदारी उनपर आ गई। लॉ फर्म में क्लर्क की नौकरी कर  उन्होंने अपने परिवार का पालन-पोषण किया। 

साल 1943 में वह अफ्रीका नेशनल कांग्रेस से एक कार्यकर्ता के तौर पर जुड़े और फिर सालों तक जेल में बंद रहने के बाद वे अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष बने।

साल 1952 में उन्होंने अपने दोस्त ओलिवर  टैंबो के साथ मिलकर जोहानेसबर्ग में वकालत की शुरुआत की। इन दोनों ने रंगभेदी नीतियों के खिलाफ अभियान चलाया।

देश हित की लड़ाई के दौरान वे धीरे-धीरे राजनीति में सक्रिय होते चले गए। इसी दौरान उन्हें 27 साल के लिए जेल भी जाना पड़ा।

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साल 1990 में जेल से रिहा होने के बाद नेल्सन मंडेला ने शांति के मार्ग पर चलकर लोकतांत्रिक अफ्रीका की नींव रखी। इसके बाद साल 1994 में दक्षिण अफ्रीका में हुए चुनाव में मंडेला की पार्टी को भारी जीत मिली। 10 मई 1994 में वे दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने।

नेल्सन मंडेला ने जिस तरह से देश में रंगभेद के खिलाफ अपना अभियान चलाया उसने दुनियाभर को अपनी ओर आकर्षित किया, यही कारण रहा कि भारत सरकार ने 1990 में उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया। वह भारत रत्न पाने वाले पहले विदेशी हैं। सिर्फ यही नहीं उन्हें साल 1993 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया।
 

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