Friday, May 07, 2021
-->
nepal-border-dispute-people-living-on-the-border-said-the-land-is-ours-it-will-be-ours-prshnt

भारत-नेपाल सीमा विवाद: बॉर्डर पर रहने वाले लोगों ने कहा- जमीन हमारी है, हमारी ही रहेगी

  • Updated on 5/26/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भारत-नेपाल के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर भार-नेपाल सीमा से लगे गांव के लोगों का कहना है कि जो जमीन हमारी है वह हमारी ही रहेगी। भारत और नेपाल के बीच एक सड़क निर्माण के बाद जन्मा यह विवाद दिनों-दिन गहराता जा रहा है। दरअसल नेपाल द्वारा काला पानी और लिपुलेख क्षेत्र पर दावा करने के बाद भारत और नेपाल के बीच संबंधों में तनातनी काफी बढ़ गई है,  जबकि इस सब विवाद को स्थानीय लोग चीन की एक चाल बता रहे हैं।

प्रवासी मजदूरों के घर भेजने का काम जारी, अब तक 40 लाख से अधिक कामगार स्पेशल ट्रेन से पहुंचे घर

सीमा के लोगों की प्रतिक्रिया
बता दें कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला पड़ाव धारचूला है और यह पिथौरागढ़ से लगती है, जो कि भारत और नेपाल सीमा पर बसा पहला गांव है। इस गांव के लोगों से जब नेपाल की हरकत पर प्रतिक्रिया ली गई तो लोगों का साफ-साफ कहना था कि नेपाल से उन लोगों के काफी अच्छे रिश्ते हैं, लेकिन जहां तक जमीन की बात है वह अपनी एक इंच भी जमीन नहीं छोड़ेंगे।

BJP सांसद नारायण राणे ने की मांग- बर्खाश्त किये जाए उद्धव सरकार, लागू हो राष्ट्रपति शासन

नेपाल का अचानक बदला रुख
बता दें कि साल 1816 में नेपाल और ब्रिटिश हुकूमत के बीच एक संधि सुगौली के तहत कालापानी से निकलकर बहने वाली काली नदी भारत और नेपाल का सीमांकन करती है, इस नदी के एक तरफ भारत और दूसरी तरफ नेपाल है। लेकिन आब नेपाल सुगौली की संधि से हटकर कालापानी को ही नहीं बल्कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा को भी अपना बताने लगा है। इस बारे में स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लोग यहां सदियों से रह रहे हैं यह जमीन हमेशा भारत का ही रहा है, लेकिन नेपाल के अचानक बदले रुख से वे भी हैरान हैं।

कोरोना से गई कोटाधारक की जान, परिवार को सताया संक्रमण का डर

दोनों देशों के रिश्ते में आई खटास 
बता दें कि भारत और नेपाल के इलाकों में रहने वाले लोगों व्यापारिक और वैवाहिक संबंध रहे हैं, सीमा के पास बसे लोगों में आपसी वैवाहिक संबंध है। बॉर्डर पर बसे नेपाल के लोग भी नेपाल की ओर से बदले सुर से हैरान हैं, उनका कहना है कि भारत हमेशा से नेपाल का हितैषी ही रहा है, इस कारण वह भी भारत को अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं। वहीं कालापानी और लिपुलेख विवाद के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के रिश्ते में खटास दिखाई दे रही है।

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें

comments

.
.
.
.
.