Thursday, Jun 24, 2021
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nepal could not escape from the crooked eye of china seized 10 areas albsnt

चीन की टेढ़ी नजर से नहीं बच सका नेपाल, इन इलाकों पर किया कब्जा

  • Updated on 6/24/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अभी हाल में जब भारत ने उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर यात्रा को सुगम बनाने के लिये सड़क निर्माण करा रही थी तो नेपाल ने आपत्ति जताकर सबको चौंका ही दिया। नेपाल ने दावा किया कि भारत के लिपुलेख,कालापानी और लिम्पियाधुरा सुगौली संधि के तहत उनका हिस्सा है। यहां तक नेपाल ने संसद से भी नया नक्शा आनन-फानन में पास करा लिया। लेकिन इसे चीन के दवाब में नेपाल के उठाये गए कदम भी माना गया। हालांकि अब नेपाल खुद चीन के विस्तारवादी नीतियों का शिकार बनता जा रहा है। इस बाबत नेपाल के ही एक आंतरिक रिपोर्ट में ओली सरकार को आगाह किया गया है। जिसके बाद ओली सरकार के पैरों तले की जमीं ही खिसक गई है। 

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दरअसल तिबब्त में नदियों के बहाव के रुख को बदलकर चीन की सरकार ने सड़क निर्माण तेजी से कराया है। जिससे नेपाली भूमि का अतिक्रमण भी हुआ है। यहीं नहीं इस गोपनीय रिपोर्ट की मानें तो चीन वहां जल्द ही सीमा चौकी स्थापित करके नेपाल के लिये बड़ी सिरदर्दी पैदा कर देगी। चीन की इस हरकत से नेपाल के लगभग 33 हेक्टेयर में फैले 10 इलाकों पर खतरा मंडराने लगा है। चीन ने नेपाल के हुमला जिले में 10 हेक्टेयर जमीन हथिया ली है। जबकि रसुवा की 6 हेक्टेयर भूमि पर अपना दावा भी ठोक दिया है। 

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दूसरी तरफ नेपाल ने 1960 में ही चीन के साथ सटे सीमा को चिन्हित करने के लिये लगभग 100 पिलर लगाया था। जबकि भारत के साथ 8553 पिलर सीमा को चिन्हित के लिये लगाया गया है। मालूम हो कि चीन की सीमा 14 देशों से लगती है। हालांकि चीन 23 देशों की जमीन पर कब्जा करने के लिये तरह-तरह के पैंतरा दिखाता रहता है।   

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