राजस्थान में पुराने बाबुओं पर हावी हो रही ‘नेतागिरी’

  • Updated on 11/19/2018

राजस्थान में विधानसभा चुनावों में कुछ ही सप्ताह बचे हैं और ठीक  उससे पहले राज्य में सभी दलों को  राजस्थान विधानसभा के टिकट मांगने वाले उन नेताओं में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है जो पूर्व  आई.ए.एस. और आई.पी.एस. अधिकारी रह चुके हैं और अब नेता की भूमिका में आ गए हैं।

इस चुनौती का सामना दोनों मुख्य दलों भाजपा और कांग्रेस को एक समान स्तर पर करना पड़ रहा है। पुराने बाबू अब राजनीतिक लबादा ओढऩे के लिए आतुर हो रहे हैं। हालांकि किसी भी तरह से यह कोई नया रुझान नहीं है, पर यह देखना दिलचस्प है कि कैसे इन सेवानिवृत्त बाबुओं को राजनीति के कीड़े ने काटा है।

शक्तिशाली नेताओं के आसपास अपने करियर का एक बड़ा हिस्सा काट चुके नेताओं को अब खुद भी अपने लिए उसी सत्ता मद की तलाश है। यही कारण है कि कुछ सेवानिवृत्त बाबुओं ने राजनीतिक अखाड़े में दमखम दिखाने के लिए अपनी बाबुओं वाली टोपी को उतार फैंका है। 

सूत्रों के अनुसार सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी अजय सिंह चित्तौड़ा विद्याधर नगर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट मांग रहे हैं। वहीं, एक और सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी लालचंद असवाल दुदु निर्वाचन क्षेत्र से टिकट मांग रहे हैं। राजस्थान में कई पूर्व नौकरशाह रहे हैं जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में सफल करियर का आनंद लिया है। न

मो नारायण मीणा मनमोहन सिंह सरकार में 2 बार लगातार मंत्री बन चुके हैं। उनके भाई और राजस्थान के पूर्व डी.जी.पी. हरीश मीणा वर्तमान में दौसा से भाजपा सांसद हैं। वर्तमान सरकार में वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी एक आई.ए.एस. अधिकारी थे।

यह भी एक दिलचस्प तथ्य है कि राज्य में किसी भी महिला अधिकारी ने सेवानिवृत्ति के बाद वैकल्पिक करियर के रूप में राजनीति में किस्मत नहीं आजमाई है।

अंदरखाते चल रही रस्साकशी के चलते सी.बी.आई. की छवि सबसे निचले स्तर पर
सैंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वैस्टीगेशन (सी.बी.आई.) में बहुत ही नाटकीय घटनाक्रम जारी है और सब कुछ सार्वजनिक स्तर पर हो रहा है, इसके साथ ही सॢवसिज और कैडर्स ने कुछ साल पहले मोदी सरकार द्वारा पेश की गई 360 डिग्री पर मूल्यांकन विधि के बारे में सवाल उठाना शुरू कर दिया है। आखिरकार, सी.बी.आई. में हालिया घटनाक्रम जिसमें अधिकारियों ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए, वह इसी नई प्रक्रिया का परिणाम है।

इस 360 डिग्री पद्धति को इस विश्वास में पेश किया गया था कि वरिष्ठ अधिकारी जूनियर के साथ अपने संबंधों को खराब नहीं करना चाहते हैं, इसलिए उत्कृष्ट ए.सी.आर./ए.पी.आर. रिकॉर्ड करें, भले ही वे लायक न हों। प्रणाली न केवल अपारदर्शी के रूप में देखी जाती है बल्कि स्थापित तंत्र का भी उल्लंघन करती है। पर्यवेक्षक बताते हैं कि राजस्व विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने एक-दूसरे के खिलाफ लिखित आरोप लगाए हैं। शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ षड्यंत्रों को पकडऩे में भी एक रॉ अधिकारी शामिल था। इन वरिष्ठ अधिकारियों के पैनल, चयन और तैनाती 360 डिग्री विधि के साथ की गई थी। इन सभी घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि मोदी सरकार का यह फार्मूला काम नहीं कर रहा है। 

ई.डी. में भी उठापठक, पी.एम.ओ. की छवि पर भी दाग लगे
देश की शीर्ष जांच एजैंसियां सार्वजनिक तौर पर बदनामी झेल रही हैं और इसका सबसे प्रमुख कारण इसके प्रमुख अधिकारियों के बीच सार्वजनिक हो चुकी भयंकर प्रतिद्वंद्विता है। पुलिस बनाम पुलिस, अधिकारियों के बीच चल रही इस कड़वी लड़ाई ने सी.बी.आई. की हालत खराब कर रखी है और इस पूरे मामले ने अब शक्तिशाली प्रधानमंत्री कार्यालय (पी.एम.ओ.) को भी लपेट लिया है।

इसी तरह का कुछ अजीब माहौल प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) में महसूस किया जा रहा है और वहां पर उथल-पुथल का अनुभव किया जा रहा है। ई.डी. के निदेशक करनैल सिंह को अप्रैल 2019 तक एक और सेवाविस्तार की पेशकश की गई थी लेकिन आखिरी समय में इस सेवा विस्तार को टाल दिया गया। 

आखिरी समय में मोदी सरकार ने अपनी सोच को क्यों बदल लिया, इसका उत्तर किसी के पास स्पष्ट नहीं है लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि ई.डी. के संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह ‘स्टडी’ लीव पर जा रहे हैं। जाहिर है, सिंह और सी.बी.आई. प्रमुख आलोक वर्मा (पहले से ही बाहर रखे गए हैं) को सरकार विरोधी कैम्प के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

सिंह ने वित्त सचिव हसमुख अधिया के खिलाफ हाल ही में एक पत्र में मजबूत आरोप लगाए थे जो मीडिया को लीक कर दिया गया था और फिर माफी मांगी और अपनी टिप्पणियां वापस ले लीं। सी.बी.आई. मुख्यालय में होने वाली घटनाओं ने जांच एजैंसी की प्रतिष्ठा को अपने न्यूनतम स्तर पर ला दिया है। सरकार और एजैंसियों के बीच चल रहे घमासान किसी भी तरह से उचित नहीं हैं। इसके साथ ही इन मामलों से उठी गर्द के भी जल्द बैठने की उम्मीद नहीं है।     ---दिलीप चेरियन

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