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new minimum wages salary may effect ration cards holders

राशनकार्डों पर भारी पड़ सकता है नया न्यूनतम वेतन

  • Updated on 12/2/2019

नई दिल्ली/अनामिका सिंह। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (Food and Supplies Department) द्वारा दिल्ली (Delhi) में तकरीबन 1742686 परिवारों को 2 रुपए गेंहू व 3 रुपए चावल के हिसाब से राशन वितरित किया जा रहा है। सस्ती दरों पर मिलने वाले इस राशन को प्राप्त करने के लिए जो शर्तें लागू की गईं हैं उनमें सबसे बड़ी शर्त कार्डधारी व उसके परिवार की सभी स्त्रोतों से सालाना आय 1 लाख रुपए तक होना तय किया गया है। यदि इससे अधिक सालाना आय होगी तो राशन कार्ड निरस्त कर दिया जाएगा लेकिन दिल्ली सरकार (Delhi Government) द्वारा जारी की गई नई न्यूनतम वेतन (Minimum wage) आदेश राशनकार्डों पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है।

1 लाख सालाना, लेकिन न्यूनतम वेतन बनेगा 1 लाख 78 हजार  
बता दें कि नए आदेश के अनुसार अकुशल कामगार को प्रतिमाह 14,842 रुपए तनख्वाह देना अनिवार्य है जबकि अर्धकुशल कामगार को 16,341 रुपए। ऐसे में अकुशल कामगार की तनख्वाह सालाना करीब 1 लाख 78 हजार रुपए होगी और अर्धकुशल की सालाना आय 1 लाख 96 हजार रुपए के लगभग होगी। जिसके बाद वो सस्ती दर पर राशन लेने का हकदार ही नहीं रह पाएगा।

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खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को क्राइटेरिया बदलने की है जरूरत
ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (Food and Supplies Department) को अपना क्राइटेरिया बदलने की आवश्यकता है ताकि उक्त दोनों श्रेणियों के राशनकार्डधारियों को सस्ते राशन का लाभ प्राप्त हो सके। अगर विभाग द्वारा क्राइटेरिया में परिवर्तन नहीं किया जाता है तो बढ़े स्तर पर राशनकार्ड निरस्त हो जाएंगे। वहीं विभाग द्वारा गलत तरीके से राशन प्राप्त करने वालों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत सजा का प्रावधान भी है। ऐसे में दिल्ली में तकरीबन 70 से 80 फीसदी राशनकार्ड निरस्त हो जाएंगे। सबसे ज्यादा मार उन राशनकार्डधारियों पर पड़ेगी जो प्राथमिक राशनकार्ड (पीआर) की केटेगरी में आते हैं।

राशनकार्डधारियों का होगा सर्वे
वहीं विभाग द्वारा 25 सितंबर 2019 को एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि हर सप्ताह फूड सप्लाई ऑफिसर (एफएसओ) व फूड सप्लाई इंस्पेक्टर (एफएसआई) द्वारा 20 राशनकार्डधारियों का फील्ड सर्वे कर उसकी रिपोर्ट दी जाएगी। इसके अलावा इसमें एक ओर आदेश कोटाधारकों के लिए दिया गया था कि राशन जिन कार्डधारियों को दिया जा रहा है वो इसके पात्र हैं या नहीं इसे सुनिश्चित कोटाधारक द्वारा किया जाएगा। जब राशनकार्ड विभागीय अधिकारियों द्वारा बनाए जाते हैं तो यह तय कोटाधारक कैसे कर सकता है कि वो राशन के पात्र हैं या नहीं, क्योंकि उसका काम तो राशन वितरित करने का है ना कि राशनकार्ड बनाने का। ऐसे में यदि न्यूनतम वेतन की सीमा को पार करने वाले राशनकार्डधारी को गलती से राशन कोटाधारक दे देता है तो उस पर गाज गिरनी लाजिमी है। 

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कितने प्रकार के हैं कार्ड
वर्तमान में दिल्ली में तीन प्रकार के राशनकार्डों द्वारा राशन वितरित किया जाता है। जिसमें अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के तहत करीब 68563 कार्ड हैं। जबकि प्राथमिकता राशनकार्ड-चीनी सहित (पीआर-एस) में 173671 कार्ड हैं और प्राथमिक राशनकार्ड (पीआर) केटेगरी में सर्वाधिक 1502801 कार्ड हैं।

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क्या कहती है एसोसिएशन 
इस बारे में पूछे जाने पर दिल्ली सरकारी राशन डीलर्स संघ (डीएसआरडीएस) के सचिव सौरभ गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में भी प्रावधान है कि सरकार हर वित्तीय वर्ष में अभियान चलाएगी जिसमें पात्र व अपात्र राशनकार्डधारियों की जांच की जाएगी और राज्य सरकार अपात्र कार्डधारियों के राशनकार्ड रद्द करेगी। राशनकार्ड बनाने की ओर घर-घर जाकर पात्रता जांचने की जिम्मेदारी विभाग के अधिकारियों की है ना कि कोटाधारकों की फिर भी विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए कोटाधारकों के गले पर तलवार रखकर उनसे पात्र व अपात्र तय करने का आदेश दे रहे हैं। इसका विरोध एसोसिएशन लगातार कर रही है। साथ ही खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को समय के अनुसार पात्रता शर्तें भी जल्द ही बदलनी चाहिए वरना राजधानी में लाखों राशनकार्डधारी सस्ते राशन से अछूते रह जाएंगे।
 

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