Thursday, Mar 04, 2021
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बढ़ते प्रदूषण पर NGT का बड़ा फैसला, दिल्ली-NCR में आज रात से पटाखों पर बैन

  • Updated on 11/9/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली- एनसीआर (Delhi-NCR) में प्रदूषण (Pollution) का कहर बढ़ता जा रहा है। जिसके कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन हो रही है। ऐसे में शनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली एनसीआर के लोगों को जहरीली हवा से बचाने के लिए आज यानी 9 नवंबर मध्यरात्रि से लेकर 30 नवंबर को आधी रात तक सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। बता दें कि इससे पहले दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने राज्य में पटाखों की बिक्री पर बैन लगा दिया था।

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देश के हर शहर और कस्बे पर होगा लागू - NGT
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल के नेतृत्व वाली एक पीठ ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह प्रतिबंध देश के हर उस शहर और कस्बे पर लागू होगा जहां नवंबर के महीने (पिछले साल के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार) में वायु गुणवत्ता 'खराब' या उससे ऊपर की श्रेणियों में दर्ज की गई थी।

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इन शहरों में 2 घंटे के लिए मिली छूट
पीठ ने कहा, 'वैसे शहर या कस्बे जहां वायु गणवत्ता 'मध्यम' या उसके नीचे दर्ज की गई, वहां सिर्फ हरित पटाखों की बिक्री हो सकती है और दिवाली, छठ, नया साल/क्रिसमस की पूर्व संध्या जैसे अन्य मौकों पर पटाखों के इस्तेमाल और उन्हें फोड़ने की समय सीमा को दो घंटे तक ही सीमित रखी जा सकती है, जैसा कि संबंधित राज्य इसको तय कर सकते हैं।'

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देश के बाकी हिस्सों के लिए भी दिए निर्देश
पीठ ने कहा, 'वहीं अन्य स्थानों पर प्रतिबंध/रोक अधिकारियों के लिए वैकल्पिक है और अगर अधिकारियों के आदेश में इस संबंध में कड़े कदम हैं, तो वे लागू होंगे।' इसके अलावा एनजीटी ने सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को सभी स्रोतों से होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रण में करने के लिए पहल शुरू करने का निर्देश दिया क्योंकि प्रदूषण से संभावित रूप से कोविड-19 के मामले बढ़ सकते हैं।

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NCR में लगातार पांचवें दिन वायु गुणवत्ता 'गंभीर'
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सोमवार को लगातार पांचवें दिन भी वायु गुणवत्ता 'गंभीर' की श्रेणी में बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर ऐप के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रमुख शहरों में बुलंदशहर सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 497 दर्ज किया गया। दूसरे नंबर पर गाजियाबाद रहा जहां एक्यूआई 483 रहा। गौतमबुद्ध नगर में एक्यूआई 482, इंदिरापुरम में एक्यूआई 476, आगरा में एक्यूआई 451, हापुड़ में एक्यूआई 427, दिल्ली में एक्यूआई 464, फरीदाबाद में एक्यूआई 462, गुरुग्राम में एक्यूआई 475, बहादुरगढ़ में एक्यूआई 443, भिवानी में एक्यूआई 479,  मुरथल में एक्यूआई 414, और रोहतक में एक्यूआई 449 रहा।

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प्रदूषण में पराली का योगदान
अधिकारियों के अनुसार गाड़ियों से निकलने वाला काला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाले पीएम कण, सड़कों पर फैली धूल, उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन और पड़ोसी राज्यों में जलाई जा रही पराली वायु प्रदूषण के कुछ मुख्य कारक हैं। गौतमबुद्ध नगर के क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी प्रवीण कुमार ने बताया कि वायु प्रदूषण को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गौतमबुद्ध नगर में 15 कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं, जो प्रदूषण विभाग की अनुमति लिए बगैर ही कार्य कर रही थीं।

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दिल्ली में सांस लेना हुआ दुर्लभ
प्रदूषण से निजात पाने में जुटी दिल्ली सरकार के सभी प्रयास असफल होते नजर आ रहे हैं। दिल्लीवासी एक तरफ जहां कोरोना महामारी की मार झेल रहे हैं। वहीं दूसरी ओर हवा में तेजी से घुलते जहर ने अब सांस लेना भी दुर्लभ कर दिया है। जहां देखो वहां धुंघ की चादर छाई हुई है, जिसके चलते लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत हो रही है। विशेषज्ञों ने भी इस स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है।

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