Monday, Nov 29, 2021
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nirbhaya case the culprits can be hanged in two stages whole process

निर्भया मामले में दोषियों को दो चरणों में दी जा सकती है फांसी, जानें पूरी प्रक्रिया

  • Updated on 12/12/2019

नई दिल्ली/ प्रियंका शर्मा। निर्भया (Nirbhaya) के साथ हुए दरिंदगी को 8 साल बीत चुके हैं और इंसाफ पाने की आस में निर्भया के माता-पिता की आंखें रोज देश की न्यायिक व्यवस्था पर टकटकी लगाए इतंजार कर रही हैं। ये आंखें अपनी बेटी को इंसाफ पाते देखना चाहती हैं। देश को हिला देने वाले और दिल्ली को शर्मसार करने वाली निर्भया मामले में फांसी से बचने के लिए दाखिल दया और पुनर्विचार याचिका पर अब तक कोई फैसला सामने नहीं आया है।

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देश में बढ़ रहे बलात्कार के मामले
वहीं आए दिन देश में महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। देश की न्यायिक प्रक्रिया कितनी लचर है इस बात की बानगी यह केस देता है। पीड़िता की मौत को 8 साल हो गए और अब तक उसके गुनहगारों को सजा नहीं मिली है। इन 8 सालों में देश को कई निर्भया मिली हैं और दरिंदगी की हदें पार करते हुए अमानवीयता का एक अलग स्तर बलात्कारियों ने तैयार किया।

हैदरावाद में डॉक्टर से सामूहिक बलात्कार और उसे जिंदा जला देने की घटना को कुछ ही पल बीते थे कि उन्नाव में रेप पिड़िता को जिंदा जला दिया गया। देश के ऐसे हालात को देखते हुए निर्भया मामले में जेल सूत्रों से पता चला है कि जेल प्रशासन इसमें फैसला आने से पहले हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहता है। दोषियों को अगर डेथ वारंट जारी होता है तो फांसी की प्रक्रिया में करीब छह घंटे लगेंगे। 

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कई अधिकारियों के सामने होती है फांसी देने की प्रक्रिया
दोषियों को फांसी देने पर यह पहला मौका होगा जब जेल संख्या-3 में बना फांसी घर इतने समय के लिए खुला रहेगा। बताया जा रहा है कि जिस दिन किसी दोषी को फांसी दी जाती है, उसे पांच बजे उठा दिया जाता है। नहाने के बाद उसे खुले अहाते में लाया जाता है।

उस जगह जेल अधीक्षक, उप अधीक्षक, मेडिकल ऑफिसर, सबडिविजनल मजिस्ट्रेट और सुरक्षा कर्मचारी मौजूद रहते हैं। मजिस्ट्रेट दोषी से उसकी आखरी इच्छा पूछते हैं। इस दौरान करीब 15 मिनट का वक्त्त दोषी के पास रहता है।

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जेल अधीक्षक के आदेश पर होती है फांसी
आखिरी इच्छा पूछने के बाद जल्लाद दोषी को काले कपड़े पहनाता है, उसके हाथ को रस्सी या हथकड़ी से पीछे बांध दिया जाता है। सारी प्रक्रिया पूरी होने पर जल्लाद जेल अधीक्षक को बताता है कि इंतजाम पूरे हो चुके हैं। आप आगे की कार्रवाई के लिए आदेश दें।

इसके बाद जब जेल अधीक्षक हाथ हिलाकर इशारा करते हैं, तब जल्लाद लीवर खींच देता है। फांसी के दो घंटे बाद मेडिकल ऑफिसर फांसी घर के अंदर जाकर यह सुनिश्चित करता है कि फंदे पर लटके शख्स की मौत हो हुई या नहीं। जिसके बाद वे मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करता है। 

जिस समय फांसी की सजा दी जाती है उस दौरान जेल के मुख्या दरवाजे के साथ जेल में आवाजाही बंद कर दी जाती है और सभी जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी जाती है। 

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दो चरणों में फांसी की सजा
दोषी को फांसी देने के लिए मजिस्ट्रेट के सामने लाने और और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने तक की प्रक्रिया में करीब तीन घंटे का वक्त्त लग जाता है। और तिहार जेल के संख्या तीन में जो फांसी घर बना है, जिसमें अधिकतम दो दोषियों को फांसी पर लटकाने का प्रावधान है। अगर निर्भया के दोषियों को फांसी दी जाएगी तो फांसी देने की प्रक्रिया दो चरणों में किया जाएगा। ऐसे में चार दोषियों की सजा देने में करीब छह घंटे का समय लग सकता है। 

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