Wednesday, Apr 01, 2020
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निर्भया मामला: झूठा साबित हुआ विनय, मानसिक रूप से बीमार होने का दावा फेल

  • Updated on 2/22/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। निर्भया (Nirbhaya) के दोषी विनय (Vinay) के द्वारा फांसी टालने के लिए खुद को घायल करने व अपने आप को मानसिक रूप से बीमार साबित करने की कोशिश में अपनी मां को व तिहाड़ जेल प्रशासन के कर्मचारियों को भी नहीं पहचान पाने की बात झूठी साबित हो गई है। जेल प्रशासन का दावा है कि निर्भया के चारों दोषियों का व्यवहार अभी सामान्य है। 

अधिकारियों का कहना है कि विनय जेल अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक सभी को पहचान रहा है। उसकी याददाश्त सही है। परिजनों से मुलाकात के दौरान भी उसका व्यवहार सामान्य ही रहता है। सूत्रों का कहना है कि दिवार में सिर मार कर खुद को घायल करने की कोशिश करने के बाद विनय की मुलाकात सोमवार को उसकी मां से हुई थी। 

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सामान्य नजर आया दोषी विनय
इस मुलाकात में वह सामान्य नजर आ रहा था। 3 मार्च सुबह 6 बजे फांसी देने के लिए नया डेथ वारंट जारी होने के बाद निर्भया के चारों दोषियों ने इससे बचने लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए हैं। 16 फरवरी को चारों दोषियों में से एक विनय कुमार शर्मा ने अपना सिर दीवार पर मार लिया था। उसने अपने वकील एपी सिंह के जरिए दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में याचिका दायर कर दावा किया है कि उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। 

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चारों दोषियों की काउंसलिंग
वहीं निर्भया के दोषियों के लिए जारी तीन मार्च को फांसी के फरमान के बाद चारों दोषी फांसी पर लटकाए जाएंगे। जैसे-जैसे तीन मार्च की तारीख नजदीक आती जा रही है, जेल प्रशासन दोषियों के व्यवहार को लेकर सतर्क हो गया है। इनका व्यवहार सामान्य बना रहे, इसके लिए चारों दोषियों की काउंसलिंग कराई जा रही है। 

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फांसी के मांग को लेकर मार्च
द्वारका के स्थानीय निवासी निर्भया के दोषियों को फंसी पर लटकाए जाने के लिये पिछले दो महीने से रोजाना रात आठ बजे निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला जा रहा है। मार्च में निर्भया के माता-पिता भी रोजाना शामिल होते हैं। निर्भया की मां का कहना है कि लोग अपनी इच्छा से पिछले दो माह से मार्च निकाल रहे हैं। यह उन सभी लड़कियों की लड़ाई है जो घर से उम्मीद के साथ निकलती हैं कि वे अपना काम करने के बाद सुरक्षित अपने घर लौट आएंगी। 

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