Monday, Jan 21, 2019

‘बड़बोले भाजपा नेताओं के मुंह में कपड़ा ठूंसो’ ‘नितिन गडकरी की सही सलाह’

  • Updated on 12/21/2018

राजनीतिज्ञों से आशा की जाती है कि वे कोई भी ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिससे विवाद पैदा हों परंतु आज यही लोग शब्दों की मर्यादा को भूल कर अपने कड़वेे बयानों व कृत्यों से देश का वातावरण बिगाड़ रहे हैं। 

इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस वर्ष 23 अप्रैल को भाजपा सांसदों और विधायकों को फटकार लगाते हुए कहा था कि वे मीडिया के सामने विवादास्पद बयान देने से बचें परंतु इन बड़बोले नेताओं पर प्रधानमंत्री के निर्देश का कोई असर नहीं हो रहा जिसके चंद उदाहरण निम्र में दर्ज हैं : 

23 नवम्बर को बलिया से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा, ‘‘अगर राम मंदिर बनवाने के लिए हमें संविधान भी हाथ में लेना पड़ेगा तो हम इससे पीछे नहीं हटेंगे और तय करेंगे कि राम मंदिर बने। हमने 1992 में भी संविधान अपने हाथ में लिया और मस्जिद को ढहा दिया था।’’ 

‘‘यदि संविधान देरी करेगा तो लोग मंदिर बनाएंगे। यदि पी.एम. मोदी व सी.एम. योगी के होते हुए मंदिर नहीं बनेगा तो शायद कभी नहीं बनेगा।’’ 

02 दिसम्बर को नई दिल्ली में भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ‘‘जब तक नवजोत सिंह सिद्धू भाजपा में थे, वह गंगा में थे लेकिन अब वह कांग्रेस के गटर में गिर गए हैं।’’ 

11 दिसम्बर को हापुड़ भाजपा के जिला मंत्री प्रमोद जिंदल ने एस.पी. हापुड़ के सरकारी फोन नंबर पर काल करके हाफिजपुर थाना प्रभारी पर अपने कार्यकत्र्ताओं का उत्पीडऩ करने का आरोप लगाया और कहा कि यदि उन्हें जल्दी नहीं छोड़ा गया तो अपने दो-अढ़ाई सौ कार्यकत्र्ताओं के साथ हाफिजपुर थाने पहुंच कर बुलंदशहर के स्याना की तरह घटना (इंस्पैक्टर को जान से मारने) को अंजाम दिया जाएगा।  

12 दिसम्बर को बंगाल भाजपा के दिग्गज नेता और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस को ‘बकरी का तीसरा बच्चा’ करार देते हुए कहा, ‘‘3 राज्यों में कांग्रेस की सफलता पर नाचने में जुटी टी.एम.सी. खुद को यही साबित कर रही है, जिस तरह बकरी के दो बच्चे दूध पीते हैं तो तीसरा केवल उन्हें देख कर ही खुशी से उछलने-कूदने लगता है, ठीक उसी तरह टी.एम.सी. भी कांग्रेस की जीत पर ऐसा ही कर रही है।’’ 

14 दिसम्बर को एक झगड़ा निपटाने थाने पहुंचे मेरठ के भाजपा नेता कमल दत्त शर्मा ने इंस्पैक्टर सदर को हिन्दुओं का ध्यान रखने के लिए कहा और चेतावनी दी कि अगर उसे बार-बार थाने में आने को मजबूर किया गया तो ठीक नहीं होगा और इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा। 

18 दिसम्बर को फतेहपुर सीकरी से भाजपा विधायक चौधरी उदयभान सिंह प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत के लिए पहुंचे तो अचानक उन्होंने वहां की एस.डी.एम. गरिमा सिंह को डांटना शुरू कर दिया और कहा, ‘‘तेरी औकात क्या है...तू मेरी ताकत नहीं जानती...जानती नहीं मैं विधायक हूं? मुझसे हेकड़ी से बात करेगी? यह जताना चाहती है कि तू एस.डी.एम. है?’’

20 दिसम्बर को भाजपा एम.एल.सी. बुक्कल नवाब ने कहा कि हनुमान जी मुसलमान थे। उन्होंने तर्क दिया कि यही कारण है कि मुसलमानों के नाम हनुमान के नाम से मिलते-जुलते रखे जाते हैं, रहमान,रमजान, फरहान आदि।

बड़े से लेकर छोटे तक भाजपा नेताओं के इसी प्रकार के आचरण को देखते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि ‘‘भाजपा में कुछ लोगों को कम बोलने की आवश्यकता है। नेताओं को आमतौर पर मीडिया से बात करते हुए कम बोलना चाहिए।’’ 

उन्होंने 1972 की हिन्दी फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ के एक दृश्य का उल्लेख किया जिसमें एक बच्चे के माता-पिता उसे खाने से रोकने के लिए उसके मुंह में कपड़े का एक टुकड़ा डाल देते हैं। श्री गडकरी ने कहा, ‘‘हमारी पार्टी में कुछ लोगों के लिए ऐसे ही कपड़े की जरूरत है।’’

पाठक जानते ही हैं कि हम तो बार-बार इसी मुद्दे पर लिखते रहे हैं और भाजपा के बड़बोले नेताओं के बड़बोलेपन का ब्यौरा देते हुए कहते रहे हैं कि इनके तर्कहीन बिगड़े बोल और कृत्य पार्टी की छवि को आघात पहुंचा रहे हैं। 

इसी पृष्ठभूमि में नितिन गडकरी द्वारा बड़बोले नेताओं के बयानों पर रोक लगाने की आवश्यकता पर बल देना बिल्कुल सही है। ऐसा करने से आने वाले चुनावों में पार्टी को होने वाले नुक्सान तथा इनसे पैदा होने वाले अनावश्यक विवादों को रोकने में मदद मिलेगी।                                                                                                            —विजय कुमार

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