Saturday, Apr 04, 2020
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बिहार में NO NRC, क्या बीजेपी का साथ छोड़ने वाले हैं सुशासन बाबू ?

  • Updated on 2/27/2020

नई दिल्ली/प्रियंका। बिहार (Bihar) के सुशासन बाबू नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर खलबली पैदा कर दी है। उनके इस फैसले ने बीजेपी को जोर का झटका लगा है हालांकि बीजेपी आगामी चुनाव के चलते मजबूर है इसलिए वो नीतीश के इस फैसले को चुपचाप स्वीकार कर रही है। 

NRC के खिलाफ नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा में पास किया प्रस्ताव

बीजेपी की मजबूरी
दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बीजेपी नीतीश की हर बात को मानने को फिलहाल सहमत है। चुनाव को लेकर बीजेपी पहले से ही यह ऐलान कर चुकी है कि राज्य में नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही एनडीए गठबंधन चुनाव लड़ेगा। इसका एक कारण यह भी है कि बीजेपी दिल्ली और झारखंड की हार के बाद तीसरी बड़ी हार नहीं चाहती इसलिए बीजेपी पार्टी नीतीश के एनआरसी फैसले पर कुछ भी कहने से बच रही है।

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बीजेपी को किया नजरअंदाज
इस बीच, नीतीश के एनआरसी फैसले की सबसे खास बात यह रही कि इस बारे में उन्होंने बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य नेतृत्व को इस मामले में कोई जानकारी दी थी। जबकि विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के एक बयान के बाद नीतीश ने अचानक विधान सभा में एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पेश कर दिया, जिसे सदन ने पारित कर दिया। वहीं इस फैसले पर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार का पक्ष लेते हुए कहा कि यह कहना गलत होगा कि मुख्यमंत्री नीतीश ने बीजेपी को नजरअंदाज कर दिया है। 

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वापस आएंगे चाचा-भतीजे!
सूत्रों की माने तो प्रस्ताव पारित होने से पहले जब सदन में लंच ब्रेक हुआ तो इस दौरान सीएम नीतीश कुमार और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बीच इस बात पर सहमति बनी कि विधानसभा सबके मत लेकर एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित करेगा। इसके अलावा 2010 के प्रारूप में ही राज्य में एनपीआर होगा। ऐसे में ये मान लेना कि सुशासन बाबू ने किसी खास मंशा के तहत बीजेपी नेताओं से इस फैसले पर बात नहीं की, ऐसा संभव नहीं है। कुछ जानकारों की माने तो नीतीश और तेजस्वी की मुलाकात इस बात का अंदेशा दे रही है कि साल 2020 में चाचा-भतीजा एकसाथ आने वाले हैं! 

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क्या कहते हैं जानकर 
जानकारों की माने तो नीतीश कुमार बीजेपी के साथ खुद को सहज महसूस नहीं कर रहे। इस तरह से दोनों की अपनी-अपनी सियासी मजबूरियां और हालात हैं, जिसके चलते दोनों के एक दूसरे के साथ हाथ मिलाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। वहीं बिहार विधानसभा में गुरुवार को 2021 जातीय जनगणना का प्रस्ताव भी पारित हो गया। नीतीश कुमार का तीन दिन में ये दूसरा बड़ा फैसला है। 

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इससे पहले मंगलवार को विधानसभा में एनआरसी नहीं लागू करने और 2010 के प्रारूप के अनुसार एनपीआर लागू करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। यह दोनों प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुए और इसी के साथ बिहार पहला ऐसा एनडीए शासित राज्य बना, जहां एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ है ।

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