Friday, Jan 18, 2019

CBI मामले में आलोक वर्मा पर भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं: एके पटनायक

  • Updated on 1/12/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।   सीबीआई और सीबीआई की लड़ाई अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही है। आलोक वर्मा के इस्तीफा देने के बाद से मामला और गर्माता जा रहा है। इसी बीच सीवीसी की जांच की निगरानी करने वाले रिटार्ड जज एके पटनायक ने कहा है कि आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई मामला ही नही है। ना ही उनके खिलाफ कोई सबूत है पीएम मोदी की अगुवाई वाली कमेटी ने उन्हें बहुत जल्दबाजी में फैसला लिया है। आपके बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पटनाक को सीवीसी की जांच प्रकिया की निगरानी करने के लिए रखा है। 

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पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली सीवीसी ने आलोक वर्मा की सुप्रीम कोर्ट से बहाली के बाद से सीबीआई के निदेशक से हटा दिया था और गृह मंत्रालय के फायर बिग्रेड का निदेशक बनाकर कार्यभार संभालने के जिम्मेदारी दी थी। लेकिन मामले में तब और नया मोड़ आया जब आलोक वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 

वहीं सीवीसी में विपक्ष के तौर पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटाने के खिलाफ विरोध पत्र दिया था। उनका कहना था कि वर्मा को कम से कम एक बार अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए। 

जस्टिट पटनायक ने एक अखबार को बयान देते हुए कहा था कि 'आलोक वर्मा पर भ्रष्टाचार के मामले में कोई सबूत है नहीं  और पूरी जांच राकेश अस्थाना की शिकायत पर की गई थी। मैंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीवीसी की रिपोर्ट में कोई भी निष्कर्ष मेरा नहीं है।'

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दूसरी तरफ सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ भष्टाचार के मामले में दर्ज एफआईआर पर सीबीआई जांच जारी रहेगी। वहीं सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार के खिलाफ भी जांच जारी रहेगी। बता दें कि दोनों ने ही अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट से अपील की थी। 

राकेश अस्थाना और देवेंद्र कुमार पर हैदराबाद के व्यापारी सतीश बाबू सना से रिश्वत लेकर मामले को दबाने के आरोप लगे हैं। जिसके बाद दोनों के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है। डीसीपी देवेंद्र कुमार को सीबीआई ने गिरफ्तार भी किया लेकिन बाद में उन्हें निचली अदालत से जमानत मिल गई। इसके बाद दोनों ने ही हाईकोर्ट से अपील की थी जिसे बीते 20 दिसम्बर को हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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